ई-पेपरताज़ा खबरेंदुर्घटनादेशमनोरंजनशिमलासिरमौरसोलनहिमाचल

कारगिल के शेर आज भी जिंदा हैं, नई पीढ़ी में जगा रहे देशभक्ति का जुनून

कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर पूरा देश उन अमर वीरों को नमन कर रहा है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। कारगिल के रणबांकुरों की वीरगाथा आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनी हुई है।

परमवीर चक्र विजेता ऑनरेरी कैप्टन संजय कुमार आज भी राष्ट्रसेवा के अपने संकल्प पर अडिग हैं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक मंचों पर युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने, अनुशासन अपनाने और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का संदेश दे रहे हैं। उनका कहना है कि जीवन में स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन और कठिन परिश्रम से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

वहीं, कारगिल के शेरशाह कैप्टन विक्रम बत्रा की वीरगाथा अब हिमाचल के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है। उनके पिता जी.एल. बत्रा ने बताया कि अगले शैक्षणिक सत्र से छात्रों को विक्रम बत्रा के साहस और बलिदान के बारे में पढ़ाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा ले सकें। कारगिल युद्ध में उनका ऐतिहासिक उद्घोष—“ये दिल मांगे मोर”—आज भी भारतीय सेना के अदम्य साहस और विजय का प्रतीक बना हुआ है।

हिमाचल के शहीद डोला राम की वीरता भी युवाओं के लिए मिसाल बनी हुई है। ऑपरेशन विजय के दौरान उन्होंने दुश्मनों से बहादुरी से लोहा लिया और सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी पत्नी प्रेमा देवी बताती हैं कि देशप्रेम उनकी रग-रग में बसता था। यही कारण है कि उनके बलिदान से प्रेरित होकर अब तक उनके क्षेत्र के करीब 20 युवा भारतीय सेना में भर्ती हो चुके हैं।

उधर, कारगिल युद्ध के प्रथम शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के परिवार को 27 साल बाद भी न्याय का इंतजार है। उनका मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। पिता डॉ. एन.के. कालिया का कहना है कि भले ही न्याय मिलने में देरी हो रही हो, लेकिन उन्हें ईश्वर के न्याय पर पूरा विश्वास है। कैप्टन कालिया की मां आज भी बेटे के वे शब्द याद करती हैं—“मां, तुम देखना… एक दिन ऐसा काम कर जाऊंगा कि पूरी दुनिया में मेरा नाम होगा।” और सचमुच, उनका नाम आज पूरे देश के दिलों में अमर है।

कारगिल के इन वीर सपूतों की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए देशभक्ति, साहस और बलिदान का जीवंत संदेश है। आज भी टाइगर हिल, तोलोलिंग और कारगिल युद्ध स्मारक इन रणबांकुरों के शौर्य की कहानी सुनाते हैं और हर युवा को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Share with