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कालाअंब की दो फार्मा कंपनियों पर NCB की बड़ी कार्रवाई, 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज

पूरी खबर:

नाहन/शिमला। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब में स्थित दो फार्मा कंपनियों से जुड़े अंतरराज्यीय नशीली दवाओं के नेटवर्क पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में सामने आया है कि प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाओं की अवैध सप्लाई का नेटवर्क हिमाचल समेत सात राज्यों तक फैला हुआ था। इस मामले में एनसीबी ने करीब 20.10 करोड़ रुपये मूल्य की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है। अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

कालाअंब की दो कंपनियों से मिली थीं प्रतिबंधित दवाएं

एनसीबी की जांच में सिरमौर जिले के कालाअंब स्थित मैसर्स डिजिटल विजन और मैसर्स वेलिंटन हेल्थकेयर से बड़ी मात्रा में साइकोट्रोपिक दवाएं और उन्हें तैयार करने का कच्चा माल बरामद हुआ था। जांच एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों से फर्जी फर्मों के नाम पर दवाओं की सप्लाई की जा रही थी, जिन्हें आगे अवैध बाजार में पहुंचाया जाता था।

20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज

एनसीबी की वित्तीय जांच में पता चला कि प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से हासिल रकम को अलग-अलग कंपनियों के बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर किया गया। इसके बाद इस पैसे से आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी इन संपत्तियों को खरीदने के लिए वैध आय का स्रोत नहीं बता सके। इसके बाद 20.10 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 25 संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश जारी किया गया। सक्षम प्राधिकारी ने 30 अक्टूबर को इस आदेश की पुष्टि कर दी।

इन संपत्तियों में औद्योगिक प्लॉट, दुकानें, व्यावसायिक इकाइयां और आवासीय फ्लैट शामिल हैं। इनमें से अधिकांश संपत्तियां पंजाब के मोहाली में स्थित हैं। अब इन्हें बिना अनुमति बेचने या किसी अन्य के नाम हस्तांतरित करने पर रोक रहेगी।

सात राज्यों तक फैला था नेटवर्क

एनसीबी की जांच में इस नेटवर्क के तार सात राज्यों से जुड़े मिले हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। जांच में सामने आया कि दवाओं को फर्जी कंपनियों के नाम पर भेजकर अवैध तरीके से बाजार में खपाया जा रहा था।

5000 ट्रामाडोल गोलियों से शुरू हुई थी जांच

इस पूरे मामले की जांच 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5000 ट्रामाडोल गोलियां पकड़े जाने के बाद शुरू हुई थी। दवाओं की पैकेजिंग पर हरिद्वार की जेआर फार्मास्यूटिकल्स को निर्माता और देहरादून की तिवारी मेडिकल एजेंसीज को मार्केटिंग एजेंसी बताया गया था। जांच में सामने आया कि मार्केटिंग एजेंसी का वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था।

इसके बाद एनसीबी ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दवाओं की सप्लाई चेन की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ हिमाचल और उत्तराखंड की फार्मा कंपनियों से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।

34 लाख गोलियां और 10.57 लाख कफ सिरप की बोतलें बरामद

एनसीबी के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में करीब 34 लाख साइकोट्रोपिक गोलियां, कोडीन युक्त कफ सिरप की 10.57 लाख बोतलें, 50 हजार ट्रामाडोल एम्प्यूल, मिडाजोलम की 5 हजार शीशियां और करीब 2200 किलोग्राम साइकोट्रोपिक पाउडर जब्त किया गया है। इस मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

तीन आरोपी अभी भी फरार

एनसीबी के मुताबिक, अंबाला कैंट निवासी कोनिक गोयल, मानिक गोयल और उनके पिता पुरुषोत्तम लाल गोयल अभी फरार हैं। एजेंसी की ओर से बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बावजूद वे जांच में शामिल नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।

एनसीबी की यह कार्रवाई केवल नशीली दवाओं की सप्लाई रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध कारोबार से अर्जित धन और उससे बनाई गई संपत्तियों पर भी शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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