हिमाचल में कर्मचारी एक्ट पर सरकार को झटका, अब कर्मचारियों को कौन-कौन से लाभ मिलने की उम्मीद?


शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। यह मामला हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024 से जुड़ा है। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश के करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों को वित्तीय लाभ और वरिष्ठता से जुड़े मामलों में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2003 से सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर भर्तियां होती रही हैं। कई कर्मचारियों ने नियमित होने से पहले कई वर्षों तक अनुबंध पर सेवाएं दीं। ऐसे कर्मचारियों की मांग रही है कि उनकी अनुबंध सेवा अवधि को भी वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल किया जाए।
इसी विवाद के बीच राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में कर्मचारी एक्ट बनाया था। इस कानून के प्रावधानों को अनुबंध कर्मचारियों ने अदालत में चुनौती दी। उनका तर्क था कि अनुबंध पर दी गई सेवा को सेवा लाभों की गणना से अलग रखने से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
25 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए संबंधित कानून को असंवैधानिक घोषित कर निरस्त कर दिया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए रिव्यू पिटीशन दाखिल की, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
कर्मचारियों को किन लाभों की उम्मीद?
इस मामले में कर्मचारियों को निम्नलिखित लाभ मिलने की उम्मीद है:
- अनुबंध सेवा अवधि को पात्रता के अनुसार सेवा लाभों की गणना में शामिल करना।
- वरिष्ठता से जुड़े दावों पर विचार।
- वार्षिक वेतन वृद्धि और वित्तीय लाभों से संबंधित मामलों में राहत।
- पदोन्नति और अन्य परिणामी सेवा लाभों से जुड़े दावों पर नियमानुसार कार्रवाई।
हालांकि, इन लाभों का मिलना संबंधित कर्मचारी की पात्रता, लागू नियमों और अदालत के फैसलों के अनुरूप होगा। सभी कर्मचारियों को एकसमान लाभ स्वतः मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार पर पड़ सकता है हजारों करोड़ रुपये का बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, अनुबंध अवधि से जुड़े वित्तीय लाभों का भुगतान करने पर राज्य सरकार पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है। वहीं, कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतनमान के एरियर तथा अन्य लंबित वित्तीय लाभों की देनदारियों का भी उल्लेख किया गया है।
अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद कर्मचारियों की नजरें अब सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि पात्र कर्मचारियों को उनके दावों के अनुसार वित्तीय लाभ, वरिष्ठता और अन्य सेवा संबंधी लाभ कब तक मिलते हैं।
फिलहाल इस मामले में कर्मचारियों के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण अदालत के फैसलों के अनुरूप सरकारी कार्रवाई और पात्रता के आधार पर लाभों का निर्धारण होगा।




