हिमाचल के कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के चयन के लिए समितियां गठित, अधिसूचना जारी


हिमाचल में कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों को मिलेंगे नए कुलपति, राज्यपाल ने गठित कीं चयन समितियां; जानें कौन करेगा चयन और क्या है पूरा मामला
शिमला। हिमाचल प्रदेश के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता ने चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर और डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) में कुलपति पदों के लिए नई खोज-सह-चयन समितियों का गठन किया है। इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय की ओर से बुधवार को अधिसूचनाएं जारी की गईं।
तीन सदस्यीय समितियां करेंगी चयन प्रक्रिया पूरी
दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के चयन के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय समितियां बनाई गई हैं। इन समितियों का काम योग्य उम्मीदवारों पर विचार करना और कुलपति पद के लिए तीन से पांच नामों का पैनल तैयार करके राज्यपाल एवं कुलाधिपति को सौंपना होगा।
कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के लिए गठित समिति की अध्यक्षता राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट को सदस्य बनाया गया है। वहीं, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की कुलपति प्रो. मीनाक्षी गोयल को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष की ओर से नामित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
नौणी विश्वविद्यालय के लिए भी बनी अलग समिति
डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) में कुलपति चयन के लिए गठित समिति में भी संदीप भारद्वाज अध्यक्ष और डॉ. एमएल जाट सदस्य होंगे। इस समिति में केंद्रीय विश्वविद्यालय, ओडिशा के कुलपति डॉ. अजीत कुमार शासनी को यूजीसी अध्यक्ष के नामित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
दोनों समितियों का मुख्यालय लोकभवन, शिमला स्थित राज्यपाल सचिवालय में रहेगा। समितियां अपनी सुविधानुसार प्रत्यक्ष, ऑनलाइन या हाइब्रिड माध्यम से बैठकें कर सकेंगी और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नए सिरे से शुरू हुई प्रक्रिया
दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्तियों का मामला लंबे समय से चर्चा में है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2026 को दिए गए फैसले में कुलपति नियुक्ति से संबंधित राज्य के संशोधित प्रावधानों और 2026 के नियमों के कुछ हिस्सों को निरस्त कर दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों का चयन यूजीसी के 2018 के नियमों के अनुरूप नए सिरे से किया जाए। चयन समिति में यूजीसी अध्यक्ष के नामित सदस्य को शामिल करना भी जरूरी बताया गया था।
इसके बाद पुरानी चयन समितियों को भंग कर नई समितियां गठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है मामला
दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति को लेकर कानूनी विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ इस मामले में न्यायिक घटनाक्रम पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल नई समितियों के गठन से दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। अब समितियां योग्य उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर पैनल तैयार करेंगी। हालांकि, नए कुलपतियों की नियुक्ति कब तक होगी, इसकी तारीख अधिसूचना में स्पष्ट नहीं की गई है।




