हिमाचल: DSP विजय कुमार के मेडिकल बोर्ड पर गृह विभाग को आपत्ति, IGMC से मांगा स्पष्टीकरण; जानें पूरा मामला


शिमला। हिमाचल प्रदेश में डीएसपी विजय कुमार के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गठित मेडिकल बोर्ड की निष्पक्षता को लेकर नया मामला सामने आया है। गृह विभाग ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) प्रशासन से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने सवाल उठाया है कि जिस डॉक्टर ने पहले डीएसपी का उपचार किया था, उसे ही उनकी मेडिकल जांच करने वाले बोर्ड में सदस्य कैसे बनाया गया?
गृह विभाग के विशेष सचिव की ओर से इस संबंध में IGMC के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र जारी किया गया है।
जिस डॉक्टर ने किया इलाज, वही मेडिकल बोर्ड में शामिल
मेडिकल रिपोर्ट और उपचार से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा के दौरान गृह विभाग के सामने यह बात आई कि ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. राजेश सूद मेडिकल बोर्ड के सदस्य थे। बताया गया है कि वह पहले से ही डीएसपी विजय कुमार का उपचार कर रहे थे।
इस पर गृह विभाग ने सवाल किया है कि क्या नियमों के तहत किसी अधिकारी का उपचार करने वाला डॉक्टर उसी अधिकारी के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए गठित मेडिकल बोर्ड का सदस्य हो सकता है? विभाग ने आशंका जताई है कि इससे मेडिकल जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
22 सितंबर को हुई थी मेडिकल जांच
जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर को मेडिकल बोर्ड ने डीएसपी विजय कुमार की रीढ़ संबंधी स्वास्थ्य जांच की थी। इसके बाद 22 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में उन्हें कॉक्सीडीनिया (Coccydynia) से पीड़ित बताया गया था। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें रीढ़ के निचले हिस्से यानी टेलबोन के आसपास दर्द होता है।
फिलहाल गृह विभाग ने मेडिकल रिपोर्ट को निरस्त नहीं किया है। अब IGMC प्रशासन के जवाब के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
पूर्व एसपी को सरकारी गाड़ी में लिफ्ट देने से जुड़ा है मामला
गौरतलब है कि डीएसपी विजय कुमार पर शिमला के पूर्व एसपी संजीव कुमार गांधी को सरकारी वाहन में लिफ्ट देने और सरकारी गाड़ी के कथित अनधिकृत इस्तेमाल का आरोप है। इसी प्रकरण के बाद उनके स्वास्थ्य परीक्षण और मेडिकल बोर्ड की निष्पक्षता का मामला चर्चा में आया है।
अब IGMC के जवाब पर टिकी नजरें
इस पूरे मामले में अब IGMC प्रशासन को गृह विभाग के सवालों का जवाब देना है। मेडिकल बोर्ड में पहले उपचार करने वाले डॉक्टर को शामिल करने के पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी और क्या यह नियमों के अनुरूप था, इस पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल मेडिकल रिपोर्ट रद्द नहीं हुई है और न ही इस मामले में अंतिम निर्णय सामने आया है।




