कुल्लू के बाबूगोशा नाशपाती ने बढ़ाई बागवानों की उम्मीदें, मंडियों में ₹100 प्रति किलो तक मिले दाम

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इस बार बाबूगोशा नाशपाती बागवानों के लिए राहत लेकर आई है। मौसम की मार से उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा, लेकिन मंडियों में बेहतर दाम मिलने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। ए-ग्रेड बाबूगोशा नाशपाती का अधिकतम भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि गुणवत्ता के अनुसार औसत कीमत 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही है।
सेब के बाद कुल्लू में नाशपाती तेजी से प्रमुख नकदी फसल के रूप में अपनी पहचान बना रही है। इन दिनों जिले की मंडियों में बाबूगोशा की अच्छी आवक शुरू हो चुकी है और अन्य राज्यों के व्यापारी भी इसकी खरीद में रुचि दिखा रहे हैं।
खराहल घाटी के बागवान सुशील भंडारी, केहर सिंह, सुनू राम और देवराज का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाबूगोशा की मांग लगातार बढ़ी है। पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा होने वाली इस किस्म की बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी हुई है।
जिले में वर्तमान में करीब 400 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न किस्मों की नाशपाती की खेती की जा रही है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार के अनुसार, बाबूगोशा का रकबा वार्टलेट किस्म की तुलना में कम है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण इसे बाजार में अधिक कीमत मिलती है।
वहीं, बंदरोल आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मोहन ठाकुर ने बताया कि इस सीजन में बाबूगोशा के अच्छे दाम मिलने से बागवानों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है। उनका कहना है कि कम उत्पादन के बावजूद बेहतर बाजार भाव किसानों के नुकसान की भरपाई करने में मदद करेंगे।




