हिमाचल में गवाहों को मिलेगी विशेष सुरक्षा, घरों के पास लगेंगे CCTV कैमरे; गंभीर मामलों की सुनवाई होगी बंद कमरे में


हिमाचल में अब गवाहों को डराने-धमकाने वालों पर कसेगा शिकंजा, सरकार ने अधिसूचित की नई योजना
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आपराधिक मामलों की जांच और अदालतों में सुनवाई के दौरान गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश साक्षी संरक्षण स्कीम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस योजना के लागू होने से अब खतरे का सामना कर रहे गवाहों और उनके परिवारों को विशेष सुरक्षा उपलब्ध करवाने का रास्ता साफ हो गया है।
गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह योजना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 398 के तहत तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गवाह डर, दबाव या धमकी के कारण अदालत में सच्चाई बताने से पीछे न हटे।
जरूरत पड़ने पर घर के आसपास लगेंगे CCTV कैमरे
योजना के तहत गवाह की सुरक्षा के लिए उसके घर के आसपास CCTV कैमरे, सुरक्षा उपकरण और अन्य निगरानी व्यवस्थाएं स्थापित की जा सकेंगी। जरूरत पड़ने पर घर के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी और गवाह को सुरक्षा एस्कॉर्ट भी उपलब्ध करवाया जा सकेगा।
इतना ही नहीं, खतरा गंभीर होने पर गवाह की पहचान बदलने और उसे किसी दूसरे स्थान पर बसाने तक की व्यवस्था की जा सकती है। सुरक्षा का लाभ गवाह के परिवार के सदस्यों को भी मिलेगा।
गंभीर मामलों में बंद कमरे में होगी सुनवाई
गवाहों को अदालत में पेशी के दौरान आरोपी के सामने आने से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। गंभीर मामलों में बंद कमरे में सुनवाई की व्यवस्था की जा सकती है।
इसके अलावा विशेष अदालत कक्ष, लाइव वीडियो लिंक, अलग प्रवेश और निकास रास्ते तथा जरूरत पड़ने पर चेहरे और आवाज को छिपाने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे गवाह की पहचान गोपनीय रखने में मदद मिलेगी।
हर जिले में बनेगी सक्षम प्राधिकारी समिति
योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक सक्षम प्राधिकारी समिति गठित की जाएगी। गवाह या उसकी ओर से कोई प्रतिनिधि सुरक्षा के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके बाद पुलिस अधीक्षक या संबंधित उप पुलिस अधीक्षक से खतरे का आकलन करने वाली रिपोर्ट मांगी जाएगी।
पुलिस को यह रिपोर्ट पांच कार्य दिवस के भीतर समिति के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद समिति भी पांच कार्य दिवस के भीतर आवेदन पर निर्णय लेगी।
गवाहों के लिए बनेगा विशेष सुरक्षा कोष
गवाहों की सुरक्षा और पुनर्वास से संबंधित खर्चों को पूरा करने के लिए राज्य गवाह संरक्षण निधि बनाने का प्रावधान किया गया है। इसी निधि से सुरक्षा व्यवस्था और जरूरत के अनुसार अन्य सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।
हर महीने होगी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
गवाह की सुरक्षा के लिए आदेश जारी होने के बाद गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ हर महीने अनुपालन रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि गवाह को दी गई सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो रही है या नहीं।
यदि कोई गवाह या पुलिस अधिकारी सक्षम प्राधिकारी के फैसले से संतुष्ट नहीं होता है तो वह 15 दिनों के भीतर गृह विभाग के समक्ष पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकता है।
नई योजना से हिमाचल प्रदेश में आपराधिक मामलों के गवाहों को सुरक्षा मिलने और न्यायिक प्रक्रिया में बिना किसी भय के बयान देने का अवसर उपलब्ध होने की उम्मीद है।




