हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, टांडा में चार मामले आए सामने; दो मासूम बच्चे और दो बुजुर्ग संक्रमित


कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में भी स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। कांगड़ा जिले के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में बुधवार को स्वाइन फ्लू के चार मामलों की पुष्टि हुई है। अस्पताल में जांचे गए कुल आठ सैंपलों में से चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। संक्रमित मरीजों में दो छोटे बच्चे और दो बुजुर्ग शामिल हैं।
टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के अनुसार, संक्रमितों में कांगड़ा जिले के सात माह और एक वर्ष की उम्र के दो मासूम बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा चंबा जिले के 72 और 85 वर्ष के दो बुजुर्गों में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन सतर्क हो गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
अस्पताल प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। सर्दी-जुकाम, बुखार, लगातार खांसी या गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देने पर मास्क पहनने, भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचने और आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवाने की सलाह दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू को एच1एन1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है। यह एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं और उचित देखभाल से मरीज ठीक हो सकता है। हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू में अचानक तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, अत्यधिक थकान, नाक बहना या नाक बंद होना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या मतली की शिकायत भी हो सकती है। जरूरी नहीं कि हर संक्रमित व्यक्ति में सभी लक्षण एक साथ दिखाई दें।
गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह
अगर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या लगातार स्वास्थ्य बिगड़ने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। हल्के लक्षणों में पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना महत्वपूर्ण है। दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और लंबे समय से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।
गौरतलब है कि इससे पहले आईजीएमसी शिमला में स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध मामला सामने आया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अब टांडा मेडिकल कॉलेज में चार मामलों की पुष्टि के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।




