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हिमाचल में पानी से बिजली बनाने की बड़ी उम्मीद पर क्यों लगा ब्रेक? 527 हाइड्रो प्रोजेक्ट अटके, अब नवंबर तक का इंतजार

शिमला। हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर विधानसभा में बड़ा आंकड़ा सामने आया है। प्रदेश में स्वीकृत 773 हाइड्रो परियोजनाओं में से 527 परियोजनाओं का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इन 527 परियोजनाओं की कुल क्षमता 7,621 मेगावाट है।

विधानसभा में विधायक हंसराज की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार प्रदेश में कुल 773 जलविद्युत परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी कुल क्षमता 21,751 मेगावाट है।

527 परियोजनाएं अभी निर्माण चरण में नहीं पहुंचीं

सरकार के अनुसार स्वीकृत परियोजनाओं में से 527 परियोजनाएं अभी तक निर्माण चरण में नहीं पहुंच सकी हैं। यानी प्रदेश की बड़ी जलविद्युत क्षमता का एक हिस्सा फिलहाल परियोजनाओं के धरातल पर उतरने का इंतजार कर रहा है।

इसी कड़ी में चुराह विधानसभा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित साईकोठी-1 और साईकोठी-2 परियोजनाएं भी शामिल हैं।

शिलान्यास के एक साल बाद भी नहीं पहुंची मशीनें

चुराह की साईकोठी-1 परियोजना की क्षमता 15 मेगावाट और साईकोठी-2 की क्षमता 18 मेगावाट है। दोनों परियोजनाओं की आधारशिला 4 अगस्त 2025 को रखी गई थी।

शिलान्यास को एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद अभी तक निर्माण स्थल पर मशीनें नहीं पहुंची हैं।

सरकार ने विधानसभा में बताया कि इन परियोजनाओं के लिए प्री-क्वालिफिकेशन टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बोलियों का मूल्यांकन भी किया जा चुका है।

अब टेंडर प्रक्रिया के दूसरे चरण को पूरा करने के बाद नवंबर तक कार्य आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

जमीन और मुआवजे को लेकर क्या कहा सरकार ने?

परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर सरकार ने कहा कि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जा रही है।

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों को नीति के प्रावधानों के अनुसार रोजगार दिया जाएगा।

चांजू-द्वितीय परियोजना से 45 लोगों को रोजगार

विधानसभा में सरकार ने चांजू-द्वितीय जलविद्युत परियोजना की स्थिति की भी जानकारी दी।

19.8 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना का निर्माण फरवरी 2018 में शुरू हुआ था। अगस्त 2021 में इसका निर्माण पूरा होने के बाद यहां बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया।

इस परियोजना में अब तक 45 स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार दिया गया है।

हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत की बड़ी संभावनाओं के बावजूद सैकड़ों परियोजनाओं का निर्माण शुरू न हो पाना एक अहम मुद्दा बना हुआ है। अब सरकार की नजर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर परियोजनाओं को धरातल पर उतारने और नवंबर के बाद निर्माण कार्य शुरू करवाने पर है।

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