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हिमुडा CEO नियुक्ति विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अधिसूचना रद्द, दो हफ्ते में पात्र अधिकारियों पर नए सिरे से विचार के आदेश



शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) के सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने 27 मई 2025 की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना को निरस्त करते हुए नियुक्ति को नियमों के विपरीत और गैर-कानूनी करार दिया है।
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और हिमुडा को निर्देश दिए हैं कि दो सप्ताह के भीतर आर एंड पी नियम, 2012 के तहत पात्र अधिकारियों के मामलों पर नए सिरे से विचार किया जाए। इस प्रक्रिया में याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।


वरिष्ठ अधिकारी को हटाकर कनिष्ठ की नियुक्ति का विवाद
मामला हिमुडा में कार्यरत अंजोरी कपूर और सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ से जुड़ा है। सेवा रिकॉर्ड के अनुसार अंजोरी कपूर सुरेंद्र कुमार से वरिष्ठ हैं।


रिकॉर्ड के मुताबिक 9 दिसंबर 2022 को अंजोरी कपूर को हिमुडा के एकमात्र नियमित कैडर पद पर मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत किया गया था। दूसरी ओर, उस समय अधीक्षण अभियंता रहे सुरेंद्र कुमार के पद को व्यक्तिगत स्तर पर अपग्रेड कर मुख्य अभियंता का दर्जा दिया गया था।


इसके बाद मई 2025 में हिमुडा के पुनर्गठन का हवाला देते हुए अंजोरी कपूर को सलाहकार (नीति एवं रणनीति) के पद पर री-डेजिग्नेट कर दिया गया, जबकि उनसे कनिष्ठ अधिकारी सुरेंद्र कुमार को हिमुडा के सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्त कर दिया गया।


हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि हिमुडा में मुख्य अभियंता का केवल एक नियमित कैडर पद है। किसी अधिकारी के पद को व्यक्तिगत आधार पर अपग्रेड करने से नया नियमित कैडर पद अस्तित्व में नहीं आता।


अदालत के अनुसार सुरेंद्र कुमार की पदोन्नति को नियमित कैडर पद के बराबर नहीं माना जा सकता। इसके चलते वह सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद के लिए निर्धारित आर एंड पी नियम, 2012 के तहत जरूरी पात्रता पूरी नहीं करते थे।


अदालत ने नियुक्ति को नियमों के विपरीत मानते हुए संबंधित अधिसूचना रद्द कर दी।
प्रशासनिक पुनर्गठन पर भी सवाल
अदालत ने प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया पर भी गंभीर टिप्पणी की। फैसले में कहा गया कि पुनर्गठन के प्रस्ताव में एक ही दिन में बदलाव किए गए और इसे इस तरह तैयार किया गया, जिससे कनिष्ठ अधिकारी को अनुचित लाभ मिलने और वरिष्ठ अधिकारी को उनके अधिकार से वंचित किए जाने की स्थिति बनी।


हालांकि, अदालत ने सुरेंद्र कुमार को अब तक मिले वित्तीय लाभ वापस लेने का निर्देश नहीं दिया है।
अब सरकार और हिमुडा को अदालत के निर्देश के अनुसार दो सप्ताह के भीतर पात्र अधिकारियों पर नए सिरे से विचार करना होगा और इस प्रक्रिया में अंजोरी कपूर को भी शामिल करना होगा।

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