हिमाचल में रेलवे को लेकर बड़ा अपडेट! पठानकोट-जोगिंद्रनगर लाइन होगी ब्रॉडगेज? सर्वे पूरा, अब रेलवे बोर्ड के फैसले पर टिकी नजर


पठानकोट-जोगिंद्रनगर की ऐतिहासिक नैरोगेज रेललाइन को ब्रॉडगेज में बदलने की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ गया है। प्रस्तावित करीब 170 किलोमीटर रेलमार्ग का फील्ड सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब सर्वे के आधार पर तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड के पास भेज दिया गया है।
रेलवे की ओर से किए गए सर्वे के दौरान इस रेलमार्ग पर यातायात की स्थिति, आबादी का घनत्व, स्थानीय लोगों की यात्रा की जरूरत, माल ढुलाई की संभावनाएं, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़े जुटाए गए हैं। इन सभी पहलुओं को डीपीआर में शामिल किया गया है।
डीपीआर में प्रस्तावित रेलमार्ग की तकनीकी जरूरतों के साथ-साथ यात्री और माल यातायात की संभावनाओं तथा परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता का भी अध्ययन किया गया है। अब रेलवे बोर्ड इस रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लेगा। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद ब्रॉडगेज निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ होगा।
इस परियोजना को हिमाचल के कांगड़ा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेललाइन के ब्रॉडगेज होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, उद्योग और माल ढुलाई को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे कांगड़ा घाटी की रेल कनेक्टिविटी भी पहले के मुकाबले बेहतर हो सकती है।
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेललाइन लंबे समय से हिमाचल की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल रही है। ब्रॉडगेज होने के बाद इस मार्ग पर बड़े स्तर पर रेल संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी और यात्रियों के साथ-साथ कारोबार से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
इसी कड़ी में जोगिंद्रनगर से मंडी तक रेललाइन विस्तार के प्रस्ताव को भी भविष्य की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो कांगड़ा क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को मंडी से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
कांगड़ा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने भी कहा है कि पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेललाइन को ब्रॉडगेज करने के कार्य को रेलवे अमलीजामा पहनाएगा। परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है।
रेलवे के अनुसार करीब 170 किलोमीटर के प्रस्तावित रेलमार्ग का फील्ड सर्वे पूरा हो चुका है और डीपीआर रेलवे बोर्ड के अंतिम निर्णय के लिए भेजी जा चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रेलवे बोर्ड से इस प्रस्ताव को कब मंजूरी मिलती है और इसके बाद ब्रॉडगेज निर्माण का काम जमीन पर कब शुरू होता है।




