शिमला में टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा: कागजों में खाली प्लॉट, मौके पर खड़े मिले 4 से 6 मंजिला होटल


शिमला: राजधानी शिमला में प्रॉपर्टी टैक्स चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम की जांच में कच्चीघाटी और भट्ठाकुफर में पांच ऐसी संपत्तियां मिली हैं, जिन्हें रिकॉर्ड में खाली प्लॉट दिखाकर टैक्स जमा किया जा रहा था, जबकि मौके पर चार से छह मंजिला होटल खड़े मिले।नगर निगम की टीम जब इन संपत्तियों का मौके पर सत्यापन करने पहुंची तो कागजों में दर्ज खाली जमीन की जगह बहुमंजिला होटल देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में कच्चीघाटी के तीन और भट्ठाकुफर के दो मामले सामने आए हैं।नगर निगम के अनुसार इन भवनों का निर्माण वर्ष 2021-22 में हुआ था। इसके बावजूद संपत्ति मालिकों की ओर से भवनों के बजाय खाली जमीन के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया जा रहा था।
चार साल का टैक्स ब्याज सहित वसूलेगा निगम
अब नगर निगम इन संपत्ति मालिकों से पिछले चार वर्षों का बकाया प्रॉपर्टी टैक्स ब्याज सहित वसूल करेगा। टैक्स शाखा के आकलन के मुताबिक होटल के आकार और क्षेत्रफल के आधार पर प्रत्येक मामले में करीब एक से तीन लाख रुपये तक की वसूली हो सकती है।
जांच के बाद कुछ होटल मालिकों ने नगर निगम से स्व-मूल्यांकन के आवेदन फॉर्म भी लिए हैं। फॉर्म जमा होने के बाद नगर निगम की ओर से संशोधित टैक्स बिल जारी किए जाएंगे।
खाली जमीन पर कम लगता है टैक्स
नगर निगम के अनुसार खाली जमीन पर लगने वाला संपत्ति कर भवन की तुलना में काफी कम होता है। इसी अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने अपनी संपत्ति को रिकॉर्ड में खाली प्लॉट के रूप में दर्शाया और बाद में वहां बहुमंजिला भवन और होटल खड़े कर दिए।
शिमला शहर में करीब 35 हजार भवन मालिक नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स देते हैं। इनमें 500 से अधिक ऐसे भूमि मालिक भी हैं, जिनसे खाली जमीन का टैक्स लिया जाता है। अब निगम सर्वे और मौके पर सत्यापन के जरिए रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति का मिलान कर रहा है।
मंजिलें बढ़ाने वालों पर भी होगी कार्रवाई
नगर निगम की जांच में केवल होटल ही नहीं, बल्कि ऐसे कई भवन मालिक भी सामने आए हैं, जिन्होंने अपने भवनों का आकार एक से तीन मंजिल तक बढ़ा लिया है। इन लोगों ने बढ़े हुए निर्माण की जानकारी नगर निगम को नहीं दी और पुराने क्षेत्रफल के आधार पर ही प्रॉपर्टी टैक्स जमा करते रहे।
निगम अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ऐसे भवन मालिकों को भी बढ़े हुए क्षेत्रफल के अनुसार संशोधित टैक्स बिल जारी कर रहा है। नगर निगम के अनुसार अगले एक महीने में शहर के सभी भवन और भूमि मालिकों को संशोधित टैक्स बिल जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है।
गलत जानकारी देने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना
नगर निगम के अनुसार प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान सभी भवन मालिकों के लिए अनिवार्य है। गलत जानकारी देकर टैक्स कम कराने या टैक्स चोरी करने पर नगर निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।इसके अलावा पिछले वर्षों का बकाया टैक्स ब्याज सहित वसूला जा सकता है। टैक्स बकाया होने की स्थिति में संपत्ति से संबंधित एनओसी भी प्रभावित हो सकती है।ऑनलाइन भुगतान की सुविधानगर निगम की ओर से जारी संशोधित टैक्स बिल का भुगतान नागरिक सेवा पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित सुविधा केंद्र में नकद भुगतान की व्यवस्था भी की गई है।
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि टैक्स चोरी करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। गलत जानकारी देकर कम टैक्स जमा करने वालों से पिछले वर्षों का बकाया टैक्स भी ब्याज सहित वसूला जाएगा।




