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शिमला में नशा तस्कर पर बड़ा एक्शन, 1.64 करोड़ की संपत्ति सीज; ठियोग से जुड़े आरोपी के आर्थिक नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

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शिमला: नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को आर्थिक स्तर तक ले जाते हुए शिमला पुलिस ने ठियोग के एक एनडीपीएस मामले में आरोपी की 1.64 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की हैं। पुलिस की वित्तीय जांच में इन संपत्तियों का प्रथम दृष्टया संबंध मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित आय से पाया गया है।


मंगलवार को एएसपी मेहर पंवार ने पत्रकार वार्ता में इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस थाना ठियोग में 10 जून 2026 को एफआईआर नंबर 77/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 में मामला दर्ज किया गया था।


पुलिस के अनुसार, विश्वसनीय सूचना के आधार पर रहीघाट अस्पताल रोड, ठियोग स्थित आरोपी सोहन लाल उर्फ हैपी की दुकान की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद हुई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जांच शुरू की गई।


जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी कथित तौर पर लंबे समय से अफीम की अवैध तस्करी में संलिप्त था और ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू समेत आसपास के क्षेत्रों में इसकी आपूर्ति करता था।
आय और संपत्तियों में मिला बड़ा अंतर
मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत वित्तीय जांच के दौरान आरोपी और उसके निकट सहयोगियों की वित्तीय गतिविधियों, संपत्तियों और आय के वैध स्रोतों की जांच की गई।


जांच के दौरान पुलिस ने एक आवासीय भूमि प्लॉट, कृषि भूमि का प्लॉट, दो मंजिला दुकान, एक वाहन तथा बैंक और डाकघर खातों में जमा राशि समेत कुल करीब 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान की।


पुलिस के मुताबिक वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ये संपत्तियां प्रथम दृष्टया मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से अर्जित आय से जुड़ी पाई गईं। आरोपी की आय और उसकी संपत्तियों के बीच भी पर्याप्त अंतर सामने आया। इसके आधार पर एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत इन संपत्तियों को सीज किया गया।


2026 में 12 मामलों में 8 करोड़ से अधिक की संपत्ति सीज
शिमला पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 12 एनडीपीएस मामलों में वित्तीय जांच की गई है। इस कार्रवाई के तहत 8 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं।


पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 में एनडीपीएस मामलों में इस तरह की वित्तीय जांच और संपत्ति सीज करने की कार्रवाई नहीं हुई थी।
पुलिस का कहना है कि अब नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। नशे के कारोबार से अर्जित अवैध धन और उससे बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें सीज करना भी कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

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