बद्दी में बड़ी कार्रवाई: फूड लाइसेंस की आड़ में दवाओं का खेल! गोदाम से 26.40 लाख आयरन टैबलेट बरामद, पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं नशीली दवाए


बद्दी में दवाओं के अवैध भंडारण का खुलासा, 26.40 लाख टैबलेट जब्त
औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के बिलांवाली में औषधि नियंत्रण विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक गोदाम से 26.40 लाख फेरोक्योर टैबलेट बरामद कर जब्त की हैं। इन टैबलेट में फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल आयरन की कमी और एनीमिया के उपचार में किया जाता है।
विभागीय जांच के दौरान गोदाम में दवाओं के भंडारण से संबंधित वैध लाइसेंस और जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद पूरी खेप को कब्जे में ले लिया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि दवाओं का निर्माण और भंडारण कथित तौर पर फूड लाइसेंस की आड़ में बिना वैध ड्रग लाइसेंस के किया जा रहा था।
रात में टीम ने गोदाम पर दी दबिश
जानकारी के अनुसार मंगलवार रात ड्रग इंस्पेक्टर हरीश रनौत के नेतृत्व में औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने पुलिस के सहयोग से बिलांवाली स्थित खसरा नंबर 280 के गोदाम में दबिश दी।
तलाशी के दौरान गोदाम में भारी मात्रा में फेरोक्योर टैबलेट का स्टॉक मिला। दवाओं के भंडारण से संबंधित कोई वैध लाइसेंस या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर विभाग ने नियमानुसार दवाएं जब्त कर लीं।
अधिकारियों के अनुसार बिना लाइसेंस दवाओं का भंडारण औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है। मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अधिनियम की धारा 18(सी) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जब्त दवाओं के नमूनों की भी नियमानुसार जांच की जाएगी।
पहले भी नशीली और प्रतिबंधित दवाएं पकड़ी गईं
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गोदाम एएस केमिकल कंपनी के संचालक और उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के तिलोई निवासी अंकित कौशल से जुड़ा है।
विभाग इससे पहले भी उससे जुड़े दो ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है। आरोप है कि फूड लाइसेंस की आड़ में बिना वैध ड्रग लाइसेंस के दवाओं का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था।
बिलांवाली में एएस केमिकल के नाम से कंपनी संचालित थी, लेकिन निरीक्षण के दौरान वहां नियमित गतिविधियां नहीं मिलीं। विभाग को संदेह है कि दवाओं को किसी अन्य स्थान पर तैयार करने के बाद गोदामों में रखा जाता था और वहां से उनकी सप्लाई की जाती थी।
पहले 2.26 लाख और फिर 22 लाख नशीली दवाएं मिली थीं
इससे पहले 8 मई को बद्दी के सालासर कैंपस में दबिश के दौरान करीब 2.26 लाख नशीली दवाएं बरामद की गई थीं। इसके बाद सप्लाई की गई करीब 65 हजार दवाएं भी बरामद हुई थीं।
वहीं 26 अगस्त को अंकित कौशल से जुड़े एक अन्य गोदाम से करीब 22 लाख नशीली और प्रतिबंधित दवाएं बरामद की गई थीं। इनमें क्लोनाजेपाम, अल्प्राजोलम, ट्रामाडोल, कोडीन फॉस्फेट सिरप, टेपनाटाडोल हाइड्रोक्लोराइड, गैबापेंटिन और प्रेगाबेलिन समेत अन्य दवाएं शामिल थीं।
वर्तमान मामले में आयरन टैबलेट की बरामदगी के साथ-साथ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाल रही है।
मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं
एसपी बद्दी विनोद धीमान ने कहा कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और नशे के कारोबार में संलिप्त असामाजिक तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि बिना लाइसेंस दवाओं का भंडारण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
कालाअंब की दवा इकाई में उत्पादन पर रोक
उधर, हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने सिरमौर जिले के कालाअंब स्थित मैसर्स वेलक्योर रेमेडीज में दवा उत्पादन पर रोक लगा दी है।
केंद्र और राज्य के अधिकारियों की संयुक्त टीम के निरीक्षण में पाया गया कि पूर्व निरीक्षण के दौरान सामने आई कुछ कमियों को अभी तक दूर नहीं किया गया था। इसके बाद दवा निर्माण प्रक्रिया और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुपालन का विस्तृत आकलन किया गया।
फर्म ने कमियां दूर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डीसीए ने स्पष्ट किया है कि सभी कमियों का संतोषजनक अनुपालन होने तक उत्पादन दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
अनुपालन पूरा होने के बाद राज्य और केंद्र के नियामक अधिकारी दोबारा संयुक्त सत्यापन करेंगे। इसके बाद ही उत्पादन की अनुमति देने पर निर्णय लिया जाएगा।




