हिमकेयर जांच पर जयराम ठाकुर का सरकार पर हमला, बोले- नकली दवाओं के रैकेट की जांच से विजिलेंस पीछे क्यों? मैनपावर और तकनीकी ज्ञान की कमी पर उठाए सवाल


शिमला: हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना की जांच को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार हिमकेयर योजना को बदनाम करने के लिए जांच करवा रही है, जबकि नकली दवाओं और जीएसटी चोरी से जुड़े गंभीर आरोपों की विजिलेंस जांच से पीछे हट रही है।
जयराम ठाकुर ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी विजिलेंस की ओर से जांच करने में असमर्थता जताए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर इस मामले में जांच से पीछे हटने के पीछे क्या मंशा है।
विजिलेंस के पत्र का हवाला देकर उठाए सवाल
शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर मामले की जांच करने में असमर्थता जताई थी।
उनके अनुसार, ब्यूरो ने मामले को वित्तीय रूप से जटिल बताया था। पत्र में पर्याप्त मैनपावर, संसाधनों और राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी एवं डोमेन ज्ञान की कमी का हवाला दिया गया था। जयराम ठाकुर का कहना है कि ऐसी स्थिति में इतनी व्यापक वित्तीय हेराफेरी की जांच करना मुश्किल बताया गया।
हिमकेयर की जांच पर भी उठाया सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि विजिलेंस के पास जीएसटी चोरी और नकली दवाओं से जुड़े मामले की जांच के लिए पर्याप्त तकनीकी ज्ञान नहीं है, तो हिमकेयर योजना के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से लिए गए उपचार संबंधी फैसलों की समीक्षा करने की विशेषज्ञता कहां से आ गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिमकेयर की जांच केवल मुख्यमंत्री के बयानों को सही साबित करने के उद्देश्य से की जा रही है। हालांकि, ये आरोप जयराम ठाकुर की ओर से लगाए गए हैं।
नकली दवाओं और जीएसटी चोरी के आरोपों का मामला क्या है?
जयराम ठाकुर ने कहा कि एक दवा निर्माता पर नकली दवाओं की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में न्यायालय के समक्ष एक और प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ था, जिसमें कथित तौर पर 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी का मुद्दा उठाया गया।
उन्होंने इस मामले में विस्तृत जांच की मांग किए जाने का भी उल्लेख किया।
विजिलेंस की कार्रवाई पर भी साधा निशाना
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ विजिलेंस युद्ध स्तर पर मुकदमे दर्ज कर पूछताछ करती है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जांच पूरी होने से पहले ही तथ्यों को प्रेस रिलीज के माध्यम से सार्वजनिक कर दिया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, इसके बावजूद नकली दवाओं और जीएसटी चोरी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामले की जांच से विजिलेंस का किनारा करना कई सवाल खड़े करता है।
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि जांच एजेंसी के पास ऐसे जटिल वित्तीय मामलों की जांच के लिए पर्याप्त विशेषज्ञता नहीं है, तो सरकार को विशेषज्ञ अधिकारियों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए।
उन्होंने प्रदेश सरकार के व्यवस्था परिवर्तन के दावे पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच से बचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले संगठित भ्रष्टाचार के मामलों में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता को लेकर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन बार-बार सवाल किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
मुख्यमंत्री से पूछे तीखे सवाल
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सवाल किया कि क्या भारी वित्तीय अनियमितताओं की जांच से मना करना ही सरकार का व्यवस्था परिवर्तन है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के लिए नकली दवाओं का कथित रैकेट सामान्य मामला है या फिर इसकी जांच से बचने के पीछे कोई अन्य वजह है।
जयराम ठाकुर के इन बयानों के बाद हिमकेयर योजना और नकली दवाओं से जुड़े आरोपों को लेकर हिमाचल की राजनीति में बहस तेज होने के आसार हैं। हालांकि, नकली दवाओं की बिक्री, जीएसटी चोरी और अन्य आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




