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हिमाचल: सरकारी योजनाओं के पैसे की गलत मैपिंग पर लगेगी रोक, एसएनए स्पर्श में नई व्यवस्था लागू; गलत खाता डी-एक्टिवेट करने से लेकर स्कीम रिजेक्ट करने तक के प्रावधान

शिमला: सरकारी योजनाओं का पैसा अब गलत बैंक खाते में मैप होकर भटकने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एसएनए स्पर्श प्रणाली में नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत किसी योजना के लिए गलत राज्य सरकार के खाते की मैपिंग पाए जाने पर उसे डी-एक्टिवेट किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर पहले से मंजूर स्कीम कॉन्फिगरेशन को रिजेक्ट करने का भी प्रावधान किया गया है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस नई व्यवस्था को लेकर सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के फंड फ्लो, भुगतान प्रक्रिया और बैंक खातों की मैपिंग में होने वाली गलतियों को कम करना है।

केंद्र सरकार ने जारी किया नया एसओपी

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के महालेखा नियंत्रक कार्यालय ने एसएनए स्पर्श को लेकर नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है। इसमें स्टेट स्कीम मैनेजर (एसएसएम) और पीडी चेकर की जिम्मेदारियों के साथ पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

नई व्यवस्था के तहत योजना के लिए स्वीकृत बैंक खाते, फंडिंग पैटर्न और भुगतान व्यवस्था का रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट रखने पर जोर दिया गया है।

गलत खाते की मैपिंग मिली तो किया जा सकेगा डी-एक्टिवेट

एसओपी में सबसे अहम प्रावधान राज्य सरकार के खाते की मैपिंग को लेकर किया गया है। यदि किसी योजना में स्वीकृत राज्य सरकार के खाते की मैपिंग गलत पाई जाती है, तो संबंधित मैपिंग को डी-एक्टिवेट किया जा सकेगा।

इसी तरह, आवश्यकता होने पर पहले से मंजूर स्कीम कॉन्फिगरेशन को रिजेक्ट करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। इससे योजनाओं के फंड फ्लो और भुगतान व्यवस्था में गलतियों की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।

नई योजनाओं में डीबीटी और थर्ड पार्टी फंडिंग की जानकारी जरूरी

अब एसएनए स्पर्श में किसी नई योजना का कॉन्फिगरेशन करते समय यह स्पष्ट करना अनिवार्य होगा कि उसमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी लागू है या नहीं।

इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि योजना में थर्ड पार्टी फंडिंग है या नहीं। यदि किसी योजना में थर्ड पार्टी फंडिंग शामिल है, तो उसके प्रतिशत योगदान का विवरण भी दर्ज करना होगा।

इस व्यवस्था से योजना में होने वाली फंडिंग और लाभार्थियों तक पहुंचने वाले भुगतान की जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज की जा सकेगी।

पहले से मंजूर योजनाओं में भी अपडेट करनी होगी जानकारी

नई व्यवस्था केवल नई योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगी। पहले से मंजूर योजनाओं में भी स्टेट स्कीम मैनेजर को डीबीटी और थर्ड पार्टी फंडिंग से जुड़े नए फील्ड में जानकारी अपडेट करनी होगी।

इस अपडेट के लिए पीडी चेकर से दोबारा मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। जानकारी अपडेट होने के बाद योजना का स्टेटस अप्रूवड ही रहेगा।

हालांकि, पुरानी मंजूर योजनाओं की अन्य जानकारियों में इस प्रक्रिया के तहत बदलाव नहीं किया जा सकेगा। अपडेट की सुविधा केवल डीबीटी और थर्ड पार्टी फंडिंग से जुड़े नए विवरणों तक सीमित रहेगी।

लाभार्थियों तक पैसा पहुंचाने में कम होगी गलतियों की आशंका

नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के पैसे के प्रवाह और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। खासकर डीबीटी वाली योजनाओं में बैंक खाते की गलत मैपिंग के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है।

अब गलत अकाउंट मैपिंग मिलने पर उसे निष्क्रिय करने और जरूरत पड़ने पर स्कीम कॉन्फिगरेशन को रिजेक्ट करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इससे सरकारी योजनाओं के फंडिंग पैटर्न और भुगतान व्यवस्था की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।

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