हिमाचल की 93 दवाओं पर सवाल, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे सेवन?


हिमाचल प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सितंबर 2026 के ड्रग अलर्ट में देशभर की 330 दवाओं के सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 93 दवाएं भी शामिल हैं। इस खुलासे के बाद दवा निर्माण उद्योग और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोलन की कंपनियों की दवाओं के सबसे ज्यादा सैंपल फेल
रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में फेल हुए 93 सैंपलों में से 73 सोलन, 18 सिरमौर और दो ऊना जिले की कंपनियों में निर्मित दवाओं के हैं। प्रदेश के इन औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयां संचालित हैं। ऐसे में इस रिपोर्ट ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर ध्यान खींचा है।
कई बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल
ड्रग अलर्ट में विभिन्न बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें बुखार, दर्द, खांसी, एलर्जी, एसिडिटी, संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याओं, उच्च रक्तचाप और थायरॉइड जैसी समस्याओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
हालांकि, सभी दवाओं के नाम और उनके संबंधित बैच नंबर की जानकारी के बिना यह कहना सही नहीं होगा कि किसी व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की जा रही दवा भी इस सूची में शामिल है।
दवा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
दवाओं के सैंपल फेल होने के बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। औषधि नियंत्रण विभाग संबंधित दवाओं की गुणवत्ता की जांच करेगा और आवश्यकतानुसार प्रभावित बैचों को बाजार से वापस मंगवाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
क्या आपको भी सावधान होने की जरूरत है?
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य नियमित रूप से दवाओं का सेवन करता है, तो घबराने के बजाय दवा का नाम, निर्माता कंपनी और बैच नंबर जांचना जरूरी है। केवल किसी दवा का सैंपल फेल होने से यह साबित नहीं होता कि उस दवा के सभी बैच खराब हैं।
यदि आपकी दवा ड्रग अलर्ट में शामिल है, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें। जरूरी दवा को अपने डॉक्टर की सलाह के बिना अचानक बंद न करें।




