10 साल का इंतजार हुआ खत्म… रेणुकाजी में फिर गूंजेगी टाइगर की दहाड़, 2 अक्टूबर से दिखेंगे ‘मेहमान’


सिरमौर। रेणुकाजी मिनी जू में करीब एक दशक से जिस पल का इंतजार किया जा रहा था, वह आखिरकार करीब आ गया है। महाराष्ट्र के नागपुर से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा रविवार को रेणुकाजी पहुंच गया। अब जल्द ही पर्यटकों को भी इन खूंखार लेकिन आकर्षक वन्यजीवों का दीदार हो सकेगा।
दोनों बाघ करीब 1800 से 1900 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर नागपुर के गोरेवाड़ा से रेणुकाजी पहुंचे हैं। फिलहाल उन्हें पर्यटकों के सामने नहीं लाया गया है। दोनों को मिनी जू के अंदरूनी वार्ड में रखा गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनके स्वास्थ्य और नए वातावरण के साथ अनुकूलन पर नजर रखी जा रही है।
वन्य प्राणी विभाग के अनुसार करीब 10 दिन तक निगरानी के बाद बाघों को बाहरी बाड़े में छोड़े जाने की तैयारी है। सब कुछ सामान्य रहा तो 2 अक्टूबर से पर्यटक रेणुकाजी में रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े को देख सकेंगे।
1.67 करोड़ रुपये में तैयार हुआ बाघों का आधुनिक बाड़ा
बाघों के आने से पहले रेणुकाजी मिनी जू में उनके लिए आधुनिक सुविधाओं वाला विशेष बाड़ा तैयार किया गया है। विभाग के अनुसार इस बाड़े के निर्माण पर करीब 1.67 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें भविष्य में चार बाघों को रखने की क्षमता होने की जानकारी दी गई है।
बाघों की चिकित्सा सुविधा के लिए करीब 32 लाख रुपये की लागत से वन्य प्राणी अस्पताल भी तैयार किया गया है। इससे जू में वन्यजीवों के उपचार और देखभाल की सुविधाएं मजबूत होंगी।
वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत आए बाघ
रॉयल बंगाल टाइगर का यह जोड़ा वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा से हिमाचल लाया गया है। जानकारी के अनुसार इस आदान-प्रदान में रेणुकाजी जू से जंगली मुर्गे का जोड़ा महाराष्ट्र के टाइगर बचाव केंद्र को दिया गया और बदले में रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा हिमाचल पहुंचा।
इस आदान-प्रदान को अगस्त 2026 में मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई थी।
वन्य प्राणी मंडल शिमला के वन मंडल अधिकारी डॉ. शाहनवाज अहमद भट्ट ने बाघों के रेणुकाजी पहुंचने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि फिलहाल दोनों बाघों को अंदरूनी वार्ड में रखा गया है और चिकित्सकों की निगरानी के बाद उन्हें बाहरी बाड़े में छोड़ा जाएगा।
यानी करीब 10 साल बाद रेणुकाजी मिनी जू में एक बार फिर टाइगर की दहाड़ सुनाई देने वाली है। अगर तैयारी तय कार्यक्रम के मुताबिक रही तो 2 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए यह खास आकर्षण शुरू हो जाएगा।




