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हिमाचल में नशा तस्करों पर अब और कसेगा शिकंजा, शिमला में खुलेगा NCB का जोनल कार्यालय; विदेश भागे तस्करों की मांगी सूची

शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने की तैयारी है। दिसंबर 2026 तक शिमला में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) का जोनल कार्यालय स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद एनसीबी की टीम शिमला से हिमाचल में नशे से जुड़े मामलों पर निगरानी और कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी।

एनसीबी चंडीगढ़ और अमृतसर के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने बताया कि जोनल डायरेक्टर की अगुवाई में पूरी टीम शिमला से एनसीबी का काम देखेगी। उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल से विदेश भागे भगोड़े नशा तस्करों की सूची सरकार से मांगी गई है, ताकि उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

दिसंबर तक शिमला में कार्यालय स्थापित करने का लक्ष्य

नशा मुक्त भारत-2029 के रोडमैप के तहत हिमाचल में नशा तस्करी पर कार्रवाई के साथ रोकथाम, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत शिमला में एनसीबी का जोनल कार्यालय स्थापित करने की तैयारी है।

नशा तस्करी से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए देश के विभिन्न राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

स्कूल-कॉलेजों के लिए ड्रग फ्री कैंपस का लक्ष्य

मार्च 2027 तक सभी स्कूल और कॉलेजों में ड्रग फ्री कैंपस फ्रेमवर्क लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर का सुरक्षित क्षेत्र विकसित किया जाएगा।

इसके अलावा 170 केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों की प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग करने की योजना है। एनसीसी, एनएसएस और माय भारत के माध्यम से एक लाख नशा-मुक्ति मित्र तैयार करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

ड्रग नेटवर्क की वित्तीय जांच पर भी जोर

नए रोडमैप के तहत राज्य पुलिस, एएनटीएफ और जिला पुलिस को नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क की पहचान करने के साथ उनके वित्तीय लेनदेन, आपूर्ति श्रृंखला और जेल नेटवर्क पर भी कार्रवाई करनी होगी।

2029 तक 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने और 100 भगोड़ों की वापसी का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है। वहीं दिसंबर 2027 तक 100 बड़े कार्टेल मामलों में वित्तीय जांच करने का लक्ष्य है।

प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर बढ़ेगी निगरानी

प्रीकर्सर केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई पर भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। वर्ष 2026 में 75 गुप्त लैब को ध्वस्त करने और मार्च 2027 तक प्रीकर्सर सप्लाई चेन की एंड-टू-एंड निगरानी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए विभिन्न डिजिटल और सरकारी प्रणालियों के एकीकरण के साथ केवाईसी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। डार्कनेट, क्रिप्टो के माध्यम से होने वाली गतिविधियों और अवैध नशे की खेती पर भी कार्रवाई की जाएगी।

नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने की योजना

नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान की पहुंच को 2029 तक 50 करोड़ लोगों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। 272 संवेदनशील जिलों में खेल आधारित हस्तक्षेप और प्रत्येक जिले में पांच प्रमुख कार्यक्रम चलाने की योजना है।

उपचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए देश में डी-एडिक्शन सेंटर की संख्या मौजूदा 334 से बढ़ाकर मार्च 2029 तक 1,751 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 329 जेलों में नशा मुक्ति सुविधाएं विकसित करने और 10 हजार सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाने की योजना है।

इस पूरी रणनीति के तहत हिमाचल में भी नशा तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई, विदेश भागे तस्करों की वापसी, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर एक साथ काम करने की तैयारी है।

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