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हिमाचल हाईकोर्ट का सख्त फैसला: 10 साल से सरकारी मकान पर था कब्जा, अब 50 हजार जुर्माने समेत 12.90 लाख की रिकवरी बरकरार

हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकारी आवास पर लंबे समय से चले आ रहे अनाधिकृत कब्जे के मामले में सख्त रुख बरकरार रखा है। हमीरपुर में स्वास्थ्य विभाग के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सरकारी आवास खाली न करने के मामले में दायर अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही पहले दिए गए 50 हजार रुपये के जुर्माने और 12.90 लाख रुपये की पेनल्टी रिकवरी के आदेश भी बरकरार रहेंगे।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने एकल पीठ के 29 जुलाई 2026 के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि मामले में सरकारी आवास पर लंबे समय तक अनाधिकृत कब्जा बना रहा और इस दौरान संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया।

मामला स्वास्थ्य विभाग के पूर्व अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार से जुड़ा है। अदालत के समक्ष सामने आया कि उनका तबादला शिमला होने के बाद वर्ष 2022 में उन्हें शिमला के परिमहल में भी सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बावजूद उनकी पत्नी, जो शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य हैं, ने हमीरपुर स्थित क्षेत्रीय अस्पताल के डॉक्टरों के लिए आरक्षित सरकारी आवास को खाली नहीं किया।

इस तरह परिवार के पास एक ही समय में दो सरकारी आवास होने की स्थिति बनी रही। अदालत ने कहा कि हमीरपुर का संबंधित आवास विशेष रूप से ऑन-ड्यूटी और इमरजेंसी सेवाओं में तैनात डॉक्टरों के लिए निर्धारित था।

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सरकारी आवास पर कब्जे के कारण अन्य पात्र डॉक्टरों को लंबे समय तक इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सका। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता 60 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, इसके बावजूद हमीरपुर स्थित सरकारी आवास पर कब्जा बनाए रखा गया।

खंडपीठ ने यह भी माना कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना वर्ष 2017 से इतने लंबे समय तक सरकारी आवास पर अनाधिकृत कब्जा बने रहना संभव नहीं था। इसी आधार पर एकल पीठ द्वारा संबंधित दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के निर्देश को भी बरकरार रखा गया।

अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद डॉ. नरेंद्र कुमार पर लगाया गया 50 हजार रुपये का जुर्माना चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा होगा, जबकि 12.90 लाख रुपये की पेनल्टी रिकवरी का आदेश भी प्रभावी रहेगा।

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