हिमाचल में रोजगार की तस्वीर ने चौंकाया, एक जिले में सबसे आगे तो दो जिलों में बेरोजगारी ने बढ़ाई चिंता; जानें आपके जिले का हाल

शिमला। हिमाचल प्रदेश में रोजगार की स्थिति को लेकर सामने आए नए आंकड़ों ने जिलों के बीच बड़ा अंतर उजागर किया है। कहीं बड़ी संख्या में लोग श्रम बाजार का हिस्सा बन रहे हैं और रोजगार से जुड़े आंकड़े मजबूत नजर आ रहे हैं, तो कहीं औद्योगिक गतिविधियां होने के बावजूद बेरोजगारी और युवाओं के पढ़ाई, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर रहने की दर चिंता बढ़ा रही है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से सितंबर 2026 में जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के जिला स्तरीय आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में कुल श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) 73.2 फीसदी रही। वहीं श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 69.9 फीसदी और बेरोजगारी दर 4.5 फीसदी दर्ज की गई। प्रदेश में युवाओं की नीट दर यानी पढ़ाई, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर रहने वाले युवाओं की हिस्सेदारी 20.5 फीसदी रही।
हमीरपुर में रोजगार के आंकड़े सबसे मजबूत
जिलेवार आंकड़ों में हमीरपुर श्रम बाजार में भागीदारी और रोजगार के लिहाज से मजबूत स्थिति में दिखाई देता है। यहां श्रम बल सहभागिता दर 83.5 फीसदी रही, जबकि श्रमिक जनसंख्या अनुपात 82.5 फीसदी दर्ज किया गया, जो प्रदेश के सभी जिलों में सबसे अधिक है।
हमीरपुर में बेरोजगारी दर भी अपेक्षाकृत कम 1.2 फीसदी रही। हालांकि यहां युवा नीट दर 9.3 फीसदी दर्ज की गई है। यानी रोजगार से जुड़े आंकड़े मजबूत होने के बावजूद युवाओं के एक हिस्से को पढ़ाई, प्रशिक्षण या रोजगार से जोड़ने की चुनौती बनी हुई है।
मंडी में बेरोजगारी दर सबसे कम
बेरोजगारी दर के मामले में मंडी की स्थिति सबसे कम रही। यहां बेरोजगारी दर महज 0.8 फीसदी दर्ज की गई। मंडी का श्रम बल सहभागिता दर 71.7 फीसदी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 71.2 फीसदी रहा।
मंडी में युवा नीट दर 15.4 फीसदी दर्ज की गई।
ऊना में भी बेरोजगारी कम
ऊना भी कम बेरोजगारी वाले जिलों में शामिल है। यहां बेरोजगारी दर 1.4 फीसदी रही। जिले का श्रम बल सहभागिता दर 78.2 फीसदी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 77 फीसदी दर्ज हुआ। वहीं युवा नीट दर 14.3 फीसदी रही।
सोलन और सिरमौर के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
प्रदेश के औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों सोलन और सिरमौर में तस्वीर इसके उलट नजर आती है। सोलन में बेरोजगारी दर 9 फीसदी दर्ज की गई, जबकि सिरमौर में यह बढ़कर 9.2 फीसदी हो गई। उपलब्ध जिला आंकड़ों में सिरमौर की बेरोजगारी दर सबसे अधिक रही।
सोलन के लिए सबसे बड़ी चिंता युवा नीट दर को लेकर सामने आती है। जिले में 39 फीसदी युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। यह आंकड़ा प्रदेश की औसत युवा नीट दर 20.5 फीसदी से काफी अधिक है।
कांगड़ा में भी युवाओं की बड़ी संख्या रोजगार से बाहर
कांगड़ा में श्रम बल सहभागिता दर 68.7 फीसदी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 64.3 फीसदी रहा। जिले की बेरोजगारी दर 6.5 फीसदी दर्ज की गई। वहीं युवा नीट दर 31.7 फीसदी रही, जो प्रदेश के औसत से काफी अधिक है।
चंबा और जनजातीय जिलों की स्थिति अलग
चंबा में युवा नीट दर 7.7 फीसदी रही, जो उपलब्ध जिला आंकड़ों में कम दरों में शामिल है। जिले का श्रम बल सहभागिता दर 77.1 फीसदी, श्रमिक जनसंख्या अनुपात 74.6 फीसदी और बेरोजगारी दर 3.2 फीसदी दर्ज हुई।
वहीं लाहौल-स्पीति, बिलासपुर और किन्नौर के संयुक्त क्षेत्र में युवा नीट दर 4.8 फीसदी दर्ज की गई।
शिमला में बेरोजगारी का आंकड़ा उपलब्ध नहीं
राजधानी शिमला में श्रम बल सहभागिता दर 70 फीसदी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 65.1 फीसदी दर्ज हुआ। उपलब्ध आंकड़ों में शिमला की बेरोजगारी दर का रिकॉर्ड नहीं दिया गया है, जबकि युवा नीट दर 20.5 फीसदी रही।
कुल मिलाकर पीएलएफएस के जिला स्तरीय आंकड़े हिमाचल प्रदेश में रोजगार की स्थिति में मौजूद क्षेत्रीय अंतर को सामने रखते हैं। कुछ जिलों में श्रम बाजार में भागीदारी और रोजगार की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है, जबकि सोलन, सिरमौर और कांगड़ा जैसे जिलों में बेरोजगारी या युवाओं के रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से बाहर रहने के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं।



