पालमपुर नगर निगम के प्रेशर कुकर पर क्यों उठे सवाल? 2.16 लाख खर्च, ऑडिट में नियम और कर्मचारियों की सूची तक मांगी


पालमपुर: नगर निगम पालमपुर की वित्तीय वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट में 2.16 लाख रुपये के प्रेशर कुकर की खरीद को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों को भेंट देने के लिए 155 प्रेशर कुकर खरीदे थे, लेकिन अंकेक्षण के दौरान खरीद से जुड़े नियम, सक्षम अधिकारी की अनुमति और कुकर प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की सूची प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
अक्तूबर 2024 के चयनित व्यय वाउचर की जांच में यह मामला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार 25 अक्तूबर 2024 के वाउचर संख्या 103 के तहत संतोषी इलेक्ट्रॉनिक्स से 155 प्रेशर कुकर खरीदे गए। प्रत्येक कुकर की कीमत 1,398 रुपये थी और इनकी खरीद पर कुल 2,16,690 रुपये खर्च किए गए।
ऑडिट में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर निगम की शहर की सफाई व्यवस्था पहले ही मैसर्स यश राज सर्विसेज बनूरी पालमपुर को ठेके पर दी गई है। इसके बावजूद सफाई कर्मचारियों को भेंट देने के लिए प्रेशर कुकर खरीदने का मामला सामने आया।
ऑडिट में मांगी गई जानकारी नहीं हो सकी पेश
अंकेक्षण अधिकारियों ने नगर निगम से पूछा कि यह खरीद किस नियम के तहत की गई और एक ही फर्म से खरीद के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी या नहीं। इसके अलावा जिन कर्मचारियों को प्रेशर कुकर दिए गए, उनकी सूची भी मांगी गई।
रिपोर्ट के अनुसार अंकेक्षण के दौरान निगम इन दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं कर सका। मामला नगर निगम आयुक्त के ध्यान में भी लाया गया, लेकिन ऑडिट प्रक्रिया पूरी होने तक जवाब नहीं मिल पाया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के खातों का ऑडिट अप्रैल 2026 तक पूरा किया गया और रिपोर्ट हाल ही में सरकार के समक्ष पेश की गई है।
नगर निगम पालमपुर की आयुक्त नेत्रा मेती ने कहा कि प्रेशर कुकर की खरीद का मामला उनके संज्ञान में आया है और इसे देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि दुकानों के किराये और अन्य वसूली से जुड़े मामलों में भी नोटिस दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
लाखों रुपये की वसूली भी लंबित
ऑडिट रिपोर्ट में नगर निगम की विभिन्न मदों में लाखों रुपये की वसूली लंबित होने का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक तहबाजारी शुल्क के 8.11 लाख रुपये की वसूली लंबित थी।
इसके अलावा नगर निगम की 19 खाली दुकानों से संबंधित 2.57 लाख रुपये की बकाया किराया राशि भी वसूल नहीं की गई थी।
विवाह पंजीकरण फीस को लेकर भी अनियमितता
ऑडिट के दौरान विवाह पंजीकरण शुल्क से संबंधित एक और मामला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच विवाह पंजीकरण फीस के रूप में प्राप्त 37,200 रुपये सरकारी कोष में जमा किए जाने के बजाय नगर निगम निधि खाते में जमा करवाए गए।
ऑडिट रिपोर्ट में इन मामलों को लेकर संबंधित प्रक्रिया और नियमों के अनुपालन पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब इन मामलों में नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी।



