शिमला में सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, सरकार से मांगा पूरा रिकॉर्ड; अब सामने आएगा किस आधार पर लिया गया एक्शन


शिमला: पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) नीरज भारती के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट से कंटेंट हटाने का मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से सोशल मीडिया कंटेंट हटाने की कार्रवाई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
नीरज भारती और बलदेव कुमार उर्फ बंटी सिराजी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने वाली मेटा कंपनी को भेजे गए टेक डाउन नोटिस से संबंधित दस्तावेज और जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि सोशल मीडिया कंटेंट हटाने की प्रक्रिया में आईटी रूल्स 2021 के नियम 3(1)(डी) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
हाईकोर्ट ने सरकार से उस लिखित आदेश की कॉपी भी पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर संबंधित अधिकारी को टेक डाउन नोटिस जारी करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसके साथ ही नोटिस जारी करने वाले अधिकारी का नाम, पद और रैंक भी अदालत के समक्ष रखने को कहा गया है।
अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि सोशल मीडिया पोस्ट या अन्य कंटेंट को हटाने के लिए किस कानूनी या वैधानिक प्रावधान का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि याचिकाकर्ताओं के कंटेंट में ऐसा क्या पाया गया, जिसके आधार पर उसे ब्लॉक या हटाने की कार्रवाई की गई।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने उन सटीक यूआरएल या लिंक की जानकारी भी मांगी है, जिनसे संबंधित कंटेंट को हटाने की शिकायत की गई थी।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से आवश्यक जवाब और रिकॉर्ड पेश नहीं किया जाता है, तो अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही मामले की समीक्षा कर सकती है।
मामले में हाईकोर्ट ने मेटा कंपनी को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सोशल मीडिया कंटेंट हटाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई और इसके पीछे किस कानूनी आधार का इस्तेमाल किया गया।



