नालागढ़ की कंपनी में ऐसे हुआ ₹2.10 करोड़ का खेल! बॉस बनकर आया WhatsApp मैसेज, कर्मचारी ने कर दिया करोड़ों का ट्रांसफर… राजस्थान से 2 गिरफ्तार

नालागढ़ की कंपनी से ₹2.10 करोड़ की साइबर ठगी, बॉस बनकर WhatsApp पर आया मैसेज; राजस्थान से दो आरोपी गिरफ्तार
सोलन जिले के नालागढ़ की एक कंपनी से ₹2.10 करोड़ की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम पुलिस शिमला ने मामले की जांच करते हुए राजस्थान में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, बैंक कार्ड, चेकबुक और बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार ठगी को ‘बॉस स्कैम’ या ‘सीईओ स्कैम’ के जरिए अंजाम दिया गया। साइबर ठगों ने कंपनी के एक अधिकारी की पहचान और प्रोफाइल का इस्तेमाल कर कर्मचारी से WhatsApp पर संपर्क किया। कर्मचारी को विश्वास दिलाया गया कि मैसेज कंपनी के अधिकारी की ओर से आया है और उसे तुरंत ₹2.10 करोड़ एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारी का निर्देश समझकर कर्मचारी ने बताए गए खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में जब कंपनी की ओर से जांच की गई तो पता चला कि जिस WhatsApp नंबर से निर्देश दिए गए थे, वह कंपनी के अधिकारी का था ही नहीं। इसके बाद साइबर ठगी का खुलासा हुआ और मामले की शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर की गई।
राजस्थान तक पहुंचे ठगी के तार
11 सितंबर को कंपनी प्रबंधन की शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम सेल शिमला ने मामले की जांच शुरू की। तकनीकी जांच और बैंकिंग लेनदेन की कड़ियों को खंगालने पर मामले के तार राजस्थान से जुड़े मिले। इसके बाद पुलिस टीम ने राजस्थान में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक ने कथित तौर पर अपनी कंपनी का बैंक खाता साइबर ठगी में इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध करवाया था। इसी खाते में ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा पहुंचा था। वहीं दूसरे आरोपी की भूमिका साइबर ठगी से जुड़े लोगों के ठहरने की व्यवस्था करने और बैंक खातों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सामने आई है।
दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने संबंधित बैंक से भी आवश्यक दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड हासिल किए हैं। ठगी की रकम किन-किन खातों में गई और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है।
कैसे दिया गया ठगी को अंजाम?
साइबर ठगों ने कंपनी के अधिकारी की फोटो और पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी WhatsApp प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद कर्मचारी से संपर्क कर जरूरी काम और तत्काल भुगतान का दबाव बनाया गया। कर्मचारी ने अधिकारी समझकर बिना स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए करोड़ों रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस ने जांच प्रभावित न हो, इसलिए गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
बॉस स्कैम से बचने के लिए पुलिस की सलाह
किसी भी अधिकारी के नाम से पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश मिले तो पहले सीधे फोन कॉल या आमने-सामने संपर्क कर इसकी पुष्टि करें। WhatsApp नंबर और ईमेल आईडी को भी ध्यान से जांचें। किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से भेजी गई संदिग्ध ZIP या APK फाइल डाउनलोड न करें।
अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।



