हिमाचल के इस गांव में अब रसायन वाली खेती पर लगी रोक! बड़ा भंगाल बना प्रदेश की पहली प्राकृतिक खेती वाली पंचायत, जानिए क्या-क्या बदला


बड़ा भंगाल को मिली प्राकृतिक खेती वाली पंचायत की पहचान, रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल पर रोक
कांगड़ा जिले के अति दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल को अब हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक खेती वाली पंचायत घोषित कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही पंचायत क्षेत्र में कृषि और बागवानी को रसायन मुक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पाबंदियां लागू हो गई हैं।
कृषि सचिव सी. पाल रासू की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, बड़ा भंगाल पंचायत क्षेत्र में कृषि और बागवानी फसलों के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के आयात, बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर रोक रहेगी। इसके स्थान पर प्राकृतिक खेती के अनुरूप स्थानीय संसाधनों और प्राकृतिक इनपुट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा।
संबंधित विभागों को किसानों और बागवानों को प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी सहयोग, सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जून में मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जून में बड़ा भंगाल के दौरे के दौरान क्षेत्र को प्राकृतिक खेती वाली पंचायत बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कृषि विभाग को स्थानीय लोगों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने और इसके लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल में प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले स्थानीय राजमाह को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की घोषणा भी की थी। इसके बाद कृषि विभाग ने पंचायत को प्राकृतिक खेती वाली पंचायत घोषित करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की थी।
राजमाह को मिलेगी अलग पहचान
बड़ा भंगाल का राजमाह यहां के प्रमुख स्थानीय उत्पादों में शामिल है। प्राकृतिक खेती वाली पंचायत का दर्जा मिलने के बाद सरकार की योजना रसायन मुक्त तरीके से तैयार होने वाले राजमाह की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा देने की है।
इससे स्थानीय राजमाह को अलग पहचान देने और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
ईको टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की तैयारी
प्राकृतिक खेती के साथ बड़ा भंगाल को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की भी योजना है। क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती, पारंपरिक जीवनशैली और स्थानीय कृषि उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए थे।
प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 तक प्रदेश में 2,22,893 किसान और बागवान परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके थे और यह पद्धति प्रदेश की 99.3 प्रतिशत पंचायतों तक पहुंच चुकी थी।
बड़ा भंगाल को प्राकृतिक खेती वाली पंचायत घोषित करना इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। अब पंचायत में रासायनिक इनपुट पर रोक के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभागीय सहायता और प्रशिक्षण गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।



