Himachal News: अफसरों की कोठियों की मरम्मत से सड़क-बिल्डिंग तक 31 टेंडर रद्द, पेमेंट में देरी से ठेकेदारों ने नए काम से बनाई दूरी


शिमला: हिमाचल प्रदेश में विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया को ठेकेदारों की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदार नए काम लेने से पीछे हट रहे हैं। इसके चलते अफसरों की कोठियों की रिपेयर और मरम्मत से लेकर सड़क, भवन और अन्य विकास कार्यों से जुड़े करीब 31 टेंडर रद्द करने पड़े हैं।
जानकारी के अनुसार, कई विकास कार्यों के लिए निर्धारित समय में पर्याप्त निविदाएं प्राप्त नहीं हुईं। इसके कारण विभागों को टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दोबारा निविदाएं आमंत्रित करने की स्थिति बन गई है।
करोड़ों की देनदारियां लंबित
पहले से पूरे किए जा चुके कार्यों की करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित हैं। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण उनकी कार्यशील पूंजी फंस गई है। ऐसे में नए काम शुरू करने के लिए निर्माण सामग्री, मजदूरों और मशीनरी का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।
इसका सीधा असर प्रदेश में चल रहे सरकारी विकास कार्यों की रफ्तार पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत प्रस्तावित सड़कों के निर्माण और सुधार कार्य भी ठेकेदारों की कमी से प्रभावित हो रहे हैं।
निर्माण सामग्री और डीजल के बढ़े दाम भी बड़ी वजह
हिमाचल ठेकेदार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश कुमार बिज ने कहा कि भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि तारकोल समेत अन्य निर्माण सामग्री के दाम बढ़ चुके हैं। इसके अलावा डीजल, मजदूरी और मशीनरी की लागत भी बढ़ी है।
ऐसे में भुगतान में देरी के बीच नए काम लेना ठेकेदारों के लिए आर्थिक जोखिम बन गया है। ठेकेदारों का कहना है कि जब पुराने कामों का भुगतान लंबित है तो नए प्रोजेक्ट में पैसा लगाना मुश्किल हो रहा है।
दोबारा आमंत्रित होंगे टेंडर
विभागों की ओर से नए टेंडर जारी किए जाने के बावजूद पर्याप्त ठेकेदार सामने नहीं आ रहे हैं। जिन 31 विकास कार्यों के टेंडर रद्द हुए हैं, उनके लिए नियमानुसार दोबारा टेंडर आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
ठेकेदारों की भागीदारी कम होने से सड़क, भवन और अन्य सरकारी निर्माण कार्यों में देरी की आशंका बढ़ गई है। अब विभागों के सामने लंबित भुगतान और नए टेंडरों में ठेकेदारों की भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती है।




