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हमीरपुर की सहकारी सोसायटी में ऐसा क्या हुआ? खातों के नाम पर करोड़ों का ऋण, ब्याज जुड़ते-जुड़ते आंकड़ा पहुंचा 10 करोड़ के पार


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हमीरपुर: जिले की द गुरयाह कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विसेज सोसायटी में सामने आए करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितता के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच में वर्ष 2010 से 2022 के बीच 50 से अधिक खाताधारकों के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपये के ऋण कथित तौर पर फर्जी तरीके से जारी किए जाने की बात सामने आई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर ये ऋण दर्ज किए गए, उनमें से कुछ खाताधारकों को इसकी जानकारी तक नहीं थी। जांच में सामने आया कि कुछ ऋण खाताधारकों की एफडी के आधार पर जारी किए गए थे।

पांच करोड़ का ऋण, ब्याज भी करीब पांच करोड़

जांच के अनुसार फर्जी तरीके से जारी किए गए ऋण की मूल राशि करीब पांच करोड़ रुपये थी। लंबे समय तक इस पर ब्याज जुड़ता रहा और देनदारी बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके अलावा खाताधारकों के खातों में करीब 51 लाख रुपये की अन्य वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं।

इस तरह सोसायटी में सामने आया कुल वित्तीय अनियमितता का मामला करीब 10.38 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।

एफडी के आधार पर भी जारी किए गए ऋण

विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में खाताधारकों की एफडी को आधार बनाकर ऋण जारी किए गए। संबंधित लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। जांच के दौरान तत्कालीन सचिव अश्वनी कुमार ऋण से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सके।

वर्ष 2023-24 के ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। मार्च 2023 में अश्वनी कुमार को निलंबित किया गया था और मार्च 2024 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।

जांच अभी पूरी नहीं, आगे और खुल सकते हैं राज

मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 का ऑडिट अभी जारी है। विभाग को आशंका है कि आगे की जांच में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।

मामले को लेकर विजिलेंस को भी जांच के लिए पत्राचार किया गया है। ऐसे में आने वाले समय में यह स्पष्ट हो सकता है कि सोसायटी में वित्तीय गड़बड़ी का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है।

प्रधान ने लगाए गंभीर आरोप

द गुरयाह कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विसेज सोसायटी के प्रधान प्रदीप के अनुसार, कथित तौर पर लंबे समय से फर्जी ऋण जारी किए जा रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में प्रधान बनने के बाद उन्हें मामले को लेकर संदेह हुआ था।

उनके अनुसार, कोरोना काल के बाद तत्कालीन सचिव अश्वनी कुमार के खिलाफ विभाग से जांच की सिफारिश की गई और उन्हें बर्खास्त करने का प्रस्ताव भी दिया गया था।

प्रधान ने दावा किया कि करीब पांच करोड़ रुपये के ऋण खाताधारकों की एफडी के आधार पर जारी किए गए, जबकि संबंधित लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी।

पूर्व सचिव ने कही रिकवरी की बात

वहीं, सोसायटी के पूर्व सचिव अश्वनी कुमार ने कहा कि उन्होंने जांच में विभाग को पूरा सहयोग किया है। उनके अनुसार कुछ ऋणों की रिकवरी की जा चुकी है और बाकी बचे ऋणों की भी रिकवरी की जाएगी।

फिलहाल विभागीय ऑडिट और जांच जारी है। 2024-25 और 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद ही वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही विजिलेंस जांच से भी मामले में आगे की स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

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