केएनएच की गायनी ओपीडी शिफ्टिंग पर भड़का आक्रोश, सचिवालय के बाहर महिलाओं का हंगामा; पुलिस से धक्का-मुक्की


पूरी खबर:
शिमला: कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) की गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने के फैसले के विरोध में मंगलवार को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति का प्रदर्शन उग्र हो गया। हिमलैंड से पैदल मार्च करते हुए बड़ी संख्या में महिलाएं छोटा शिमला स्थित सचिवालय के बाहर पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ओपीडी शिफ्ट करने का फैसला वापस लेने की मांग की।
सचिवालय के पास पुलिस ने महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी बैरिकेड हटाकर आगे पहुंच गईं और सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान महिलाओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कुछ समय तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
सचिवालय के बाहर सड़क पर बैठीं महिलाएं
प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करती रही। बैरिकेड हटाए जाने के बाद महिलाओं ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शनकारियों के सड़क पर बैठने से सचिवालय के बाहर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। सर्कुलर रोड पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इससे आम लोगों, कर्मचारियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पांच-छह महीने से फैसले का विरोध
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के अनुसार, कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करने के प्रस्ताव का पिछले पांच-छह महीने से विरोध किया जा रहा है। अस्पताल के स्टाफ की ओर से भी इस निर्णय पर आपत्ति जताई जा चुकी है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केएनएच में महिलाओं को एक ही परिसर में जांच और उपचार की सुविधाएं मिलती हैं। ओपीडी को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने से महिलाओं, विशेषकर गर्भवती मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है।
गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ेंगी: फालमा चौहान
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि गायनी ओपीडी को आईजीएमसी ले जाने से गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि समिति लंबे समय से इस निर्णय को वापस लेने की मांग कर रही है, लेकिन सरकार की ओर से उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
फालमा चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार नए स्वास्थ्य संस्थान विकसित करने के बजाय पहले से स्थापित अस्पताल की सुविधाओं को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि करीब 100 साल पुराने केएनएच की अपनी ऐतिहासिक पहचान है और यहां महिलाओं को एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा मिलती रही है।
‘बना-बनाया अस्पताल कमजोर किया जा रहा’
महिला समिति ने आरोप लगाया कि केएनएच की मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना महिलाओं के हित में नहीं है। फालमा चौहान के अनुसार, अस्पताल की सुविधाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित करने से मरीजों की परेशानी बढ़ेगी।
समिति का कहना है कि सरकार को महिलाओं की जरूरतों और अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए गायनी ओपीडी को केएनएच में ही संचालित रखना चाहिए।
आईजीएमसी में पहले से मरीजों का दबाव
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आईजीएमसी में पहले ही मरीजों की संख्या काफी अधिक है। महिला समिति के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 3,000 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में केएनएच की गायनी ओपीडी को भी आईजीएमसी में स्थानांतरित करने से अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
समिति का तर्क है कि इससे मरीजों को लंबी कतारों, अधिक प्रतीक्षा और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ सकता है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह व्यवस्था असुविधाजनक साबित हो सकती है।
फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
महिला समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि केएनएच की गायनी ओपीडी को वहीं संचालित रखने का निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। समिति ने प्रदेश की महिलाओं और आम लोगों से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
फालमा चौहान ने बताया कि यह मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। उनका कहना है कि सरकार को अदालत की कार्यवाही, मरीजों की सुविधा और अस्पताल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गायनी ओपीडी को केएनएच में ही बनाए रखना चाहिए।




