सोलन में कालका-शिमला रेललाइन पर फिर बारिश का कहर! टकसाल-गुम्मन के बीच ट्रैक का किनारा बहा, बह गई क्रेट वॉल और निर्माण सामग्री

सोलन: विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलमार्ग की बहाली के काम को एक बार फिर तेज बारिश ने बड़ा झटका दिया है। टकसाल से गुम्मन रेलवे स्टेशन के बीच ब्रिज नंबर 57 के पास रेलवे की ओर से दुरुस्त किया गया हिस्सा तेज पानी के बहाव में बह गया। इसके साथ ही ट्रैक के किनारे दोबारा गहरी खाई बन गई है। इस नुकसान से रेलवे को लाखों रुपये की चपत लगने की बात सामने आई है।
तेज बहाव में बह गई क्रेट वॉल
भारी बारिश से पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए रेलवे ने काम तेज किया था। प्रभावित स्थान तक निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए सेक्टर-6 से जेसीबी की मदद से अस्थायी रास्ता भी तैयार किया गया था। पानी का रुख मोड़ने के बाद जेसीबी, ट्रकों और दर्जनों मजदूरों की मदद से क्रेट वॉल यानी सुरक्षा दीवार बनाने का काम चल रहा था।
हालांकि, नाले में अचानक आए तेज उफान ने मरम्मत कार्य को नुकसान पहुंचा दिया। पानी के तेज बहाव में क्रेट वॉल के साथ मिट्टी और बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री भी बह गई।
अब दोबारा शुरू करनी होगी मरम्मत
ताजा नुकसान के बाद रेलवे के सामने प्रभावित हिस्से की मरम्मत दोबारा शुरू करने की चुनौती है। ट्रैक किनारे बनी गहरी खाई को भरने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बाद ही रेल यातायात बहाल किया जा सकेगा। हाल ही में तैयार किया गया हिस्सा फिर बहने से ट्रैक बहाली का काम और लंबा खिंच सकता है।
11 और 13 सितंबर तक ट्रेनें रद्द
रेलवे ने कालका से ट्रेनों का परिचालन 11 और 13 सितंबर तक रद्द करने की घोषणा की है। हालांकि, ताजा नुकसान को देखते हुए ट्रैक की बहाली में पहले लगाए गए अनुमान से अधिक समय लगने की आशंका भी जताई जा रही है।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी
कालका-शिमला रेल सेवा ठप होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ शिमला आने वाले पर्यटकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। पर्यटन सीजन में कालका-शिमला रेलमार्ग यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन है। ट्रेनें रद्द होने के कारण यात्रियों को अब सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है।
लगातार बारिश के बीच रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्षतिग्रस्त ट्रैक को सुरक्षित तरीके से दोबारा तैयार करना और भविष्य में तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव से इसे बचाना है।




