हिमाचल के अनुबंध शिक्षकों के लिए बड़ी राहत: 2 साल की सेवा पूरी होते ही नियमितीकरण का हक, हाईकोर्ट ने सरकार की देरी पर जताई नाराजगी

शिमला, 10 अगस्त 2026: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत अनुबंध शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक ने दो वर्ष का निरंतर अनुबंध सेवाकाल पूरा कर लिया है और उसका चयन स्वीकृत पद पर वैधानिक नियमों के तहत हुआ है, तो वह उसी तारीख से नियमितीकरण का हकदार है।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि प्रशासनिक देरी या चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर पात्र कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि पात्रता पूरी होने के बावजूद समय पर नियमितीकरण न करना कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।एरियर और अन्य वित्तीय लाभ भी देने के निर्देशहाईकोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं को 1 अप्रैल 2024 से नियमित करने और एरियर समेत सभी वित्तीय लाभ छह सप्ताह के भीतर देने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षकों को नियमित वेतनमान, वार्षिक वेतन वृद्धि और वरिष्ठता जैसे लाभों से भी वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने नियमितीकरण नीति के क्लॉज-9 को भी याचिकाकर्ताओं के मामले में अमान्य और अप्रभावी करार दिया। पीठ के अनुसार यह प्रावधान सरकार को नियमितीकरण के मामले में मनमाने ढंग से निर्णय लेने की असीमित शक्ति देता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत है।क्या है पूरा मामला?याचिकाकर्ता मोहिंद्र और अन्य का चयन वर्ष 2019 में लोक सेवा आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से हुआ था।
इसके बाद उन्हें नवंबर-दिसंबर 2021 में लेक्चरर (स्कूल-न्यू) के पद पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया।राज्य सरकार की 2 दिसंबर 2023 की नीति के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक दो वर्ष का निरंतर अनुबंध सेवाकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया जाना था। याचिकाकर्ताओं ने नवंबर-दिसंबर 2023 में ही दो वर्ष पूरे कर लिए थे, इसलिए वे 1 अप्रैल 2024 से नियमितीकरण के पात्र थे।हालांकि, सरकार ने उन्हें 6 जुलाई 2024 से नियमित किया।
चुनाव आचार संहिता का तर्क नहीं मानाराज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि लोकसभा चुनाव और उपचुनाव के कारण 16 मार्च से 14 जून 2024 तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी। इसी वजह से नियमितीकरण आदेश जारी करने में देरी हुई।हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि यदि कर्मचारी की पात्रता को लेकर कोई विवाद नहीं है, तो आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार का कर्तव्य था कि वह पात्रता के आधार पर नियमितीकरण करे। सरकार की देरी का नुकसान कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता।



