हिमाचल के अनुबंध कर्मचारियों को बड़ा झटका! बैक डेट से नहीं मिलेगा नियमितीकरण, शिक्षा विभाग ने किया साफ

शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। शिक्षा निदेशालय, शिमला ने सभी जिला उपनिदेशकों (प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा) को जारी निर्देशों में साफ कहा है कि अनुबंध कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ बैक डेट (Notional Basis) से नहीं मिलेगा। नियमितीकरण केवल निर्धारित कट-ऑफ तिथि से ही प्रभावी माना जाएगा।
शिक्षा निदेशालय ने यह स्पष्टीकरण 20 जुलाई 2026 को राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र और कार्मिक विभाग की टिप्पणियों के आधार पर जारी किया है। विभाग ने कहा है कि 2 अप्रैल 2026 के सरकारी निर्देशों में कहीं भी बैक डेट या नोटेशनल आधार पर नियमितीकरण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
इन कर्मचारियों को मिलेगा नियमितीकरण का लाभ
विभाग के अनुसार—
- 30 सितंबर 2024 तक दो वर्ष की निरंतर अनुबंध सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी 30 सितंबर 2024 से नियमितीकरण के पात्र होंगे।
- 30 सितंबर 2025 तक दो वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों का नियमितीकरण 30 सितंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा।
यानी कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ केवल निर्धारित पात्रता तिथि से मिलेगा, उससे पहले की अवधि को नियमित सेवा नहीं माना जाएगा।
नहीं मिलेगा एरियर या नोटेशनल लाभ
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को नियमितीकरण का बैक डेट लाभ, नोटेशनल लाभ या पूर्व अवधि का एरियर नहीं मिलेगा। नियमित कर्मचारी के रूप में वेतन, भत्ते और अन्य लाभ केवल उसी तिथि से लागू होंगे, जिस दिन कर्मचारी निर्धारित शर्तें पूरी कर नियमितीकरण के पात्र बने हैं।
जिला अधिकारियों को दिए निर्देश
निदेशालय ने सभी जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े सभी मामलों का निपटारा सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और ताजा स्पष्टीकरण के अनुरूप ही किया जाए। साथ ही भविष्य में भी नियमितीकरण संबंधी सभी कार्रवाई सरकार के समय-समय पर जारी आदेशों के आधार पर ही की जाएगी।
कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब बड़ी संख्या में अनुबंध कर्मचारी नियमितीकरण को बैक डेट से लागू किए जाने और पूर्व अवधि के वेतन एवं अन्य लाभ मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे। नए आदेश के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है कि नियमितीकरण की गणना केवल कट-ऑफ तिथि से होगी और इससे पहले की अवधि को नियमित सेवा का दर्जा नहीं दिया जाएगा।



