हिमाचल विधानसभा में वंदे मातरम् पर हंगामा, कार्यवाही शनिवार तक स्थगित


शिमला, 21 अगस्त। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन शुक्रवार को सदन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी विधायकों ने सदन की कार्यवाही शुरू होने पर वंदे मातरम् नहीं गाए जाने का विरोध किया। हंगामा बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बारहवां सत्र शुक्रवार को राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने वंदे मातरम् नहीं गाए जाने पर आपत्ति जताई। विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् से संबंधित कानून विधानसभा में लागू नहीं होता, बल्कि सरकारी संस्थाओं पर लागू होता है।
अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा की परंपरा के अनुसार सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है, जबकि समापन के समय वंदे मातरम् गाया जाता है। इसके बाद भी विपक्षी विधायक विरोध करते रहे। हंगामा बढ़ने पर अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित करने की चेतावनी दी। स्थिति सामान्य नहीं होने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नारेबाजी भी हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने विपक्ष के रवैये के विरोध में सदन से बाहर आकर नारेबाजी की। सत्तापक्ष के विधायकों ने विपक्ष पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया।
सत्र से पहले भाजपा का प्रदर्शन
विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले भाजपा विधायकों ने विपक्ष लॉज के बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाजपा विधायकों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन वर्तमान कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ किया गया। भाजपा ने सरकार की चुनावी गारंटियों, बेरोजगारी और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठाए और पांच लाख रोजगार देने के वादे को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
सरकार ने विपक्ष को तथ्यों के साथ आने को कहा
मानसून सत्र को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंत्रियों और विधायकों को विपक्ष के सवालों का तथ्यों और आंकड़ों के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल में उठाए जाने वाले मुद्दों पर संबंधित विभाग पूरी तैयारी के साथ सदन में आएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में पहली बार 10 दिन का सत्र बुलाया गया है। उन्होंने विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष से कहा कि वे विरोध और वॉकआउट कर सकते हैं, लेकिन सरकार को भी सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि चुनावी माहौल के कारण विपक्ष सोशल मीडिया में बने रहने के लिए सदन में हंगामा कर सकता है।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में बनी रणनीति
सत्र शुरू होने से एक दिन पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाबों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों को पूरी तैयारी के साथ सदन में आने तथा विपक्ष के सवालों का तथ्यों के आधार पर जवाब देने के निर्देश दिए। बैठक में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सहित कांग्रेस विधायक मौजूद रहे।
राजनीतिक प्रतिशोध और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाएगी भाजपा
दूसरी ओर, भाजपा विधायक दल की बैठक नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की गई।
भाजपा कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोपों, कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित मामलों, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, आपदा राहत कार्यों और कांग्रेस की चुनावी गारंटियों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा सकती है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है और प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।
पहले दिन ही टकराव के संकेत
मानसून सत्र के पहले दिन हुए हंगामे से साफ है कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल सकता है। एफआईआर, पूछताछ और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष की ओर से स्थगन प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है। प्रश्नकाल के दौरान भी विपक्ष सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांग सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने सहयोग की अपील की
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने दोनों दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को सदन में अपनी बात रखने का पर्याप्त समय दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर मानसून सत्र की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।
हालांकि, सत्र के पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर हुए हंगामे ने संकेत दे दिया है कि हिमाचल विधानसभा का यह मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी गर्म रहने वाला है।




