एचपीपीटीएफ का क्रमिक अनशन 49वें दिन भी जारी, नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली और शिक्षक पुरस्कार को लेकर सरकार पर निशाना


शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों और प्रदेश सरकार के बीच नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शिमला स्थित शिक्षा निदेशालय के बाहर प्राथमिक शिक्षक संघ का क्रमिक अनशन शनिवार को 49वें दिन में प्रवेश कर गया। शिक्षक संघ का आरोप है कि सरकार की ओर से मांगें पूरी करने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
शिक्षकों के अनुसार, चौड़ा मैदान में आयोजित विशाल धरने के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 5 सितंबर तक उनकी मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया। इससे शिक्षकों में नाराजगी और निराशा बढ़ गई है।
25 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का ऐलान
प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी 25 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। संघ ने आगामी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।
शिक्षकों का मुख्य विरोध नई कॉम्प्लेक्स या क्लस्टर प्रणाली को लेकर है। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिक्षक सरकार से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं।
राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार की निष्पक्षता पर सवाल
इसी बीच प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षक दिवस पर दिए गए राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि उनका विरोध किसी शिक्षक के व्यक्तिगत स्तर पर नहीं है, बल्कि पुरस्कार देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल हैं।
उन्होंने दावा किया कि जिस शिक्षक वीरेंद्र चौहान को यह सम्मान दिया गया है, उनके खिलाफ 11 अन्य अध्यापकों, जिनमें प्रिंसिपल, लेक्चरर और टीजीटी शामिल हैं, ने राज्यपाल और शिक्षा निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई है।
संघ के अनुसार, संबंधित शिक्षक के खिलाफ पैसों के लेन-देन को लेकर एफआईआर दर्ज है। इसके अलावा विजिलेंस जांच की मांग भी लंबित बताई गई है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षक पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से स्कूल नहीं गए हैं।
साक्षात्कार सूची में नाम नहीं होने का भी दावा
प्राथमिक शिक्षक संघ ने दावा किया कि पुरस्कृत शिक्षक का नाम साक्षात्कार की अंतिम सूची में भी शामिल नहीं था। संघ का कहना है कि ऐसे में पुरस्कार चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिक्षक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग पर शिक्षकों की मांगों के विपरीत काम करने का आरोप लगाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली होने का दावा
संघ के अनुसार, प्रदेश के शिक्षा विभाग में शिक्षकों के करीब 12,000 पद खाली पड़े हैं। इनमें से लगभग 11,000 पद प्राथमिक शिक्षकों के बताए जा रहे हैं।
शिक्षक संघ का कहना है कि बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संघ ने सरकार से रिक्त पदों को भरने और नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली से जुड़े विवाद का जल्द समाधान करने की मांग की है।
संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो क्रमिक अनशन के साथ-साथ आने वाले दिनों में राज्य स्तर पर बड़े और अधिक कड़े आंदोलन किए जाएंगे।




