अहम फैसला: आईएनडी की जांच के बाद ही भारत में आएंगी विदेश बनी दवाएं, बीबीएन के दवा उद्योगों को मिलेगी राहत


सोलन। विदेशों से भारत आने वाली नई दवाओं को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अहम फैसला लिया है। अब ऐसी दवाओं का सीधे भारत में आयात और मार्केटिंग नहीं की जा सकेगी, जिन्हें अभी तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। ऐसी दवाओं के लिए पहले इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (आईएनडी) डिविजन से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
आईएनडी डिविजन करेगा समीक्षा:
सीडीएससीओ के नए निर्देशों के अनुसार, ऐसी दवाएं जिनके फेज-3 के वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं या भारतीय नागरिकों पर क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो चुके हैं, उनके आवेदनों की समीक्षा अब सीडीएससीओ मुख्यालय स्थित आईएनडी डिविजन करेगा। आवेदकों को दवा से संबंधित गैर-क्लीनिकल और क्लीनिकल डेटा भी प्रस्तुत करना होगा।
बीबीएन के दवा उद्योगों को राहत की उम्मीद:
इस फैसले से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) के सैकड़ों दवा उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि विदेशों से वही दवाएं भारत में आएं, जो सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावकारिता के निर्धारित मानकों पर खरी उतरती हों। इससे पहले कई मामलों में फेज-3 ट्रायल के दौरान ही दवाओं के आयात और मार्केटिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी।
सीडीएससीओ देता है दवाओं के आयात को मंजूरी:
भारत में विदेश से आने वाली दवाओं और उनके आयात को सीडीएससीओ की ओर से मंजूरी दी जाती है। विदेशी निर्माता या उनके स्थानीय एजेंट भारत में दवा लाने से पहले सीडीएससीओ पोर्टल के माध्यम से उत्पाद और विनिर्माण स्थल का पंजीकरण कराते हैं। इसके बाद दवा की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावकारिता से जुड़े मानकों की जांच की जाती है।
शिकायतों के बाद लिया गया फैसला:
सीडीएससीओ को ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि भारत में क्लीनिकल ट्रायल के आधार पर उन दवाओं की मार्केटिंग की अनुमति मांगी जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर अभी अप्रमाणित या समीक्षा के अधीन हैं। इसके बाद सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने इस मामले पर विचार किया और दवाओं के गैर-क्लीनिकल व क्लीनिकल डेटा के व्यापक मूल्यांकन की जरूरत बताई।
आवेदकों को नई दिल्ली में देना होगा आवेदन:
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि संबंधित आवेदकों को अब अपने आवेदन सीधे नई दिल्ली स्थित आईएनडी डिविजन में प्रस्तुत करने होंगे। सीडीएससीओ के इस कदम का उद्देश्य देश में दवाओं की सुरक्षा और नियामकीय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना है।



