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हिमाचल: शिपकी ला से चीन के साथ छह साल बाद शुरू हुआ व्यापार फिर ठप, सिर्फ एक बार चला कारोबार; IGST बना रोड़ा


रामपुर बुशहर/किन्नौर, 9 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शिपकी ला के रास्ते चीन के साथ छह साल बाद शुरू हुआ पारंपरिक सीमा व्यापार महज एक बार चलने के बाद फिर ठप हो गया है। चीन से आयातित सामान पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) लगाए जाने के विरोध में पंजीकृत भारतीय कारोबारियों ने फिलहाल व्यापार बंद करने का फैसला लिया है।
कारोबारियों की मांग है कि पारंपरिक सीमा व्यापार को IGST से भी छूट दी जाए। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में फैसला नहीं होता, तब तक पंजीकृत व्यापारी चीन के साथ सीमा पार कारोबार नहीं करेंगे।


एक अगस्त को शुरू हुआ था व्यापार
किन्नौर प्रशासन ने एक अगस्त से शिपकी ला के रास्ते चीन के साथ व्यापार शुरू करवाया था। पहले दिन 16 कारोबारी करीब 2.22 लाख रुपये का भारतीय सामान लेकर तिब्बत के शिपकी गांव पहुंचे थे।


इसके बाद 3 अगस्त को कारोबारी चीन से आयातित सामान लेकर वापस लौटे। शिपकी ला सीमा के पास बनाए गए छुप्पन ट्रेड मार्ट में इस सामान पर IGST वसूला गया। इसके बाद कारोबारियों में नाराजगी बढ़ गई।


किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने बैठक कर मामले पर चर्चा की और सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक चीन से आयातित वस्तुओं पर IGST से छूट नहीं मिलती, तब तक कोई भी पंजीकृत व्यापारी सीमा पार व्यापार नहीं करेगा। इसके बाद से शिपकी ला के रास्ते व्यापार बंद है।


कारोबारियों पर पड़ रहा अतिरिक्त वित्तीय बोझ
कारोबारियों का कहना है कि IGST लगाए जाने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका तर्क है कि भारत सरकार की अधिसूचना संख्या 38/96-सीमा शुल्क के तहत 23 जुलाई 1996 से इस पारंपरिक सीमा व्यापार को सीमा शुल्क से छूट दी गई थी।


किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हिशे नेगी के अनुसार, शिपकी ला के रास्ते होने वाला व्यापार सामान्य वाणिज्यिक आयात-निर्यात गतिविधि नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की पारंपरिक आजीविका का साधन है।


प्रधानमंत्री को भेजा पत्र
एसोसिएशन ने 6 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। यह पत्र किन्नौर उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से भेजा गया है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।


किन्नौर के उपायुक्त अमित कुमार शर्मा ने बताया कि IGST के विरोध में पंजीकृत व्यापारियों ने फिलहाल कारोबार नहीं करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्योग सचिव को पत्र लिखा गया है। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार से भी बातचीत हुई है और उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाने का आश्वासन दिया है।


यह मामला केंद्र के राजस्व और सीमा शुल्क विभाग के संज्ञान में भी है। अब कारोबारियों की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर है कि IGST में छूट को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

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