हिमाचल में अब नदियों से रेत-बजरी निकालना नहीं होगा आसान! बिजली परियोजनाओं की कंपनियों पर सरकार कसेगी शिकंजा, जानें क्या बदलेगा नियम


शिमला। हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों की ओर से नदियों से रेत-बजरी और अन्य खनन सामग्री निकालने की व्यवस्था में अब बदलाव की तैयारी है। सरकार परियोजना संचालकों की ओर से अपने स्तर पर नदी से खनन सामग्री निकालने के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठा रही है।
सरकार का कहना है कि बिजली परियोजनाओं के लिए कंपनियों को जमीन विभिन्न शर्तों के तहत उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि परियोजना संचालकों को नदी से रेत-बजरी या अन्य खनन सामग्री निकालने का स्वतः अधिकार मिल जाता है।
सरकार की अनुमति के बिना टेंडर नहीं
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निजी बिजली कंपनियां या जलविद्युत परियोजना संचालक सरकार की अनुमति के बिना नदी से रेत-बजरी निकालने के लिए अपने स्तर पर टेंडर जारी नहीं कर सकेंगे। यदि कोई परियोजना प्रबंधन निर्धारित अनुमति के बिना ऐसी निविदा प्रक्रिया शुरू करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नई व्यवस्था में नदी से निकलने वाली खनन सामग्री की निकासी के लिए सरकारी स्तर पर ही निविदा प्रक्रिया अपनाए जाने की बात सामने आई है। इससे प्राकृतिक संसाधनों की निकासी पर सरकार की निगरानी बढ़ सकती है।
प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के अधिकार पर जोर
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू विधानसभा में नदियों से निकलने वाली खनन सामग्री और ड्रेजिंग के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार की ओर से हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों और राज्य के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में निजी, केंद्रीय और अन्य संस्थाओं की कई जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हैं या निर्माण और स्वीकृति की अलग-अलग प्रक्रियाओं में हैं।
सतलुज और चिनाब बेसिन में बड़ी परियोजनाएं
हिमाचल प्रदेश में सतलुज और चिनाब नदी बेसिन जलविद्युत परियोजनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। सतलुज बेसिन में नाथपा झाकड़ी, रामपुर, कोल डैम, करछम-वांगतू, किन्नौर इंटीग्रेटेड काशांग, शोंगटोंग-करछम, लुहरी स्टेज-I और सुन्नी डैम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
सुन्नी डैम परियोजना की क्षमता 382 मेगावाट है। इसके लिए शिमला और मंडी जिलों के विभिन्न गांवों में निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर ऊर्जा विभाग की ओर से अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।
वहीं चिनाब बेसिन में भी कई जलविद्युत परियोजनाएं संचालित और प्रस्तावित हैं। प्रदेश की जलविद्युत क्षमता के विकास में निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रेत-बजरी निकासी पर बढ़ेगी सरकारी निगरानी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद परियोजना क्षेत्रों में नदियों से निकलने वाली रेत-बजरी और अन्य खनन सामग्री की निकासी पर सरकारी निगरानी बढ़ सकती है। सरकार की कोशिश होगी कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग निर्धारित नियमों और सरकारी प्रक्रिया के तहत ही किया जाए।
फिलहाल सरकार की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में नियमों और निविदा प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


