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हिमाचल में खगोल विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा! लाहौल-स्पीति और पांगी में खगोलीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव, हर पंचायत में वर्षामापी यंत्र की भी मांग


शिमला, 9 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित पहलों को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। बैठक में विशेष रूप से प्रदेश के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लाभ पहुंचाने पर चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को लाहौल-स्पीति और पांगी के ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव से अवगत करवाया। इन केंद्रों को लद्दाख के हानले में संचालित सफल खगोलीय पहलों की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।


सीएम सुक्खू ने कहा कि लाहौल-स्पीति और पांगी में खगोलीय अनुसंधान एवं अवलोकन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाया जा सकता है। ऐसे केंद्र स्थापित होने से स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के अवसर मिलेंगे। साथ ही, जनजातीय क्षेत्रों में ज्ञान आधारित और सतत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने हिमाचल में लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के माध्यम से प्रदेश में लैवेंडर की डेमोंस्ट्रेशन साइट्स का विस्तार करने के लिए सहयोग मांगा।


सरकार का मानना है कि अधिक संख्या में प्रदर्शन स्थलों की स्थापना से किसानों को लैवेंडर की उपयुक्त खेती तकनीकों की जानकारी मिलेगी। इससे किसान इसे वैकल्पिक और लाभकारी फसल के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं।


स्कूलों में बनेंगे विज्ञान संग्रहालय
मुख्यमंत्री ने हिमाचल के आकांक्षी विकासखंडों के स्कूलों में विज्ञान संग्रहालय स्थापित करने के लिए केंद्रीय सहायता की मांग की। उन्होंने कहा कि विज्ञान संग्रहालय विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने के साथ उन्हें अनुभवात्मक शिक्षा का अवसर भी देंगे।
इससे विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


हर पंचायत में स्वचालित वर्षामापी यंत्र की मांग
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मौसम निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने हर ग्राम पंचायत में स्वचालित वर्षामापी यंत्र और हर विकासखंड स्तर पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करने की पहल में तेजी लाने का आग्रह किया।


इन उपकरणों से स्थानीय स्तर पर वर्षा और अन्य मौसम संबंधी मानकों का वास्तविक समय में सटीक आंकड़ा उपलब्ध हो सकेगा। इससे किसानों को स्थान विशेष की मौसम संबंधी जानकारी मिलेगी और वे कृषि से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकेंगे।


केंद्रीय मंत्री ने दिया सहयोग का आश्वासन
बैठक में हिमाचल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेपों को मजबूत करने से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने मंत्रालय की ओर से हिमाचल प्रदेश को हर संभव सहायता और सहयोग प्रदान करने की बात भी कही।


बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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