हिमाचल हाईकोर्ट की बड़ी राहत: आपदा पीड़ितों को जारी रिकवरी नोटिसों पर रोक, डीसी को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को बड़ी राहत देते हुए राहत राशि की वसूली के लिए जारी रिकवरी नोटिसों पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित उपायुक्त (डीसी) प्रत्येक मामले में प्रभावितों का पक्ष सुनकर नए सिरे से निर्णय नहीं लेते, तब तक किसी भी लाभार्थी से राहत राशि की वसूली नहीं की जाएगी।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने प्रेम सिंह सहित 13 याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई करते हुए संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिए कि सभी मामलों की आठ सप्ताह के भीतर दोबारा सुनवाई की जाए। अदालत ने कहा कि प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए और उसके बाद ही नियमों के अनुसार नया निर्णय लिया जाए।
बिना सुनवाई जारी किए गए थे रिकवरी नोटिस
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिकवरी नोटिस जारी करने से पहले प्रभावितों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन की जांच प्रक्रिया में भी लाभार्थियों को शामिल नहीं किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कहीं भी यह आरोप नहीं लगाया कि लाभार्थियों ने फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे या किसी प्रकार की धोखाधड़ी की थी।
2024 में राहत, 2025 में रिकवरी नोटिस
अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि वर्ष 2024 में प्रभावितों को राहत राशि प्रदान की गई, जबकि 2025 में अचानक उन्हें अयोग्य घोषित कर वसूली नोटिस जारी कर दिए गए। सरकार इस देरी का संतोषजनक कारण अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सकी।
क्या है मामला?
वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड से हजारों परिवार प्रभावित हुए थे। कई मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 अक्टूबर 2023 को विशेष राहत पैकेज लागू किया था और सर्वे के आधार पर पात्र परिवारों को किस्तों में आर्थिक सहायता दी गई।
हालांकि, फरवरी 2025 में एसडीओ (सिविल) स्तर की जांच के बाद कई लाभार्थियों को अयोग्य बताते हुए 65 हजार रुपये की पहली किस्त सहित अन्य राहत राशि वापस जमा कराने के लिए रिकवरी नोटिस जारी कर दिए गए। इन नोटिसों को प्रभावितों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अब अदालत ने राहत प्रदान की है।




