हिमाचल हाईकोर्ट के अहम निर्देश: दृष्टिबाधित भर्ती पर जवाब तलब, ड्राइंग टीचर भर्ती विवाद खत्म

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में दिव्यांगजनों के अधिकारों और दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों की भर्ती को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम अधिकारिता (ईएसओएमएसए) विभाग के निदेशक को नया और विस्तृत हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि हलफनामे में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि दृष्टिबाधित श्रेणी के चतुर्थ श्रेणी पदों को भरने के लिए अब तक क्या प्रगति हुई है, कितने विज्ञापन जारी किए गए हैं और भर्ती प्रक्रिया किस चरण में है। कोर्ट ने यह भी माना कि राज्य सरकार द्वारा पहले दाखिल किए गए हलफनामे में पर्याप्त और अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
स्वतंत्र दिव्यांग आयोग के गठन पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि हिमाचल प्रदेश में अभी तक स्वतंत्र राज्य दिव्यांग आयोग का गठन नहीं किया गया है। सरकार ने अदालत को बताया कि आयोग के गठन का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। इसी कारण आयोग के लिए अलग ढांचा और कर्मचारियों की नियुक्ति भी नहीं हो पाई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि 18 जून 2024 की अधिसूचना के तहत आयोग की शक्तियां ईएसओएमएसए निदेशक को सौंपना वैधानिक रूप से उचित नहीं है। उनका तर्क था कि यह अधिकार केवल स्वतंत्र राज्य दिव्यांग आयोग के पास होना चाहिए।
172 पदों पर भर्ती का दावा
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से 172 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। साथ ही वर्ष 2025 के सभी मामलों का निस्तारण हो चुका है और वर्ष 2026 का केवल एक मामला लंबित है। हालांकि हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया का पूरा ब्यौरा और अद्यतन स्थिति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
ड्राइंग टीचर भर्ती याचिका हुई निष्प्रभावी
इसी दौरान हाईकोर्ट ने ड्राइंग टीचर के नियमित पदों की भर्ती से जुड़ी याचिका का भी निपटारा कर दिया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 7 मई 2026 को जारी भर्ती रिक्विजिशन 2 जुलाई 2026 को वापस ले ली गई है। इसके बाद अदालत ने याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए समाप्त कर दिया।
अदालत परिसरों में दिव्यांग सुविधाओं पर भी सुनवाई
हाईकोर्ट ने जिला और उपमंडल स्तर के अदालत परिसरों में दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी सुनवाई की। रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि कई अदालत परिसरों में रैंप और लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है, जबकि कुछ स्थानों पर इनकी स्थापना के प्रस्ताव लंबित हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
हीरानगर दिव्यांग स्कूल भवन पर सरकार से जवाब
शिमला के हीरानगर स्थित एम.आर. होम, हॉस्टल और स्कूल भवन में दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं के अभाव को लेकर भी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक भवन में रैंप, हैंडरेल सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति और उन्हें दुरुस्त करने की कार्ययोजना का पूरा विवरण हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए।




