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हिमाचल: प्रथम श्रेणी अधिकारियों के बार-बार तबादले पर रोक, हाईकोर्ट ने न्यूनतम कार्यकाल तय करने को कहा


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के बार-बार और असमय तबादलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रथम श्रेणी यानी क्लास वन अधिकारियों का भी एक निश्चित और तर्कसंगत कार्यकाल होना जरूरी है


कोर्ट ने याचिकाकर्ता भबनेश चड्डा के तबादला आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को प्रथम श्रेणी अधिकारियों के लिए न्यूनतम कार्यकाल की नीति तय करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि केवल क्लास वन अधिकारी होने का मतलब यह नहीं है कि उनका बार-बार तबादला किया जाता रहे।


ढाई से तीन साल का कार्यकाल देने के निर्देश:
हाईकोर्ट ने 1 जुलाई 2026 को जारी तबादला आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उनके वर्तमान स्टेशन बालीचौकी में कम से कम ढाई से तीन साल का कार्यकाल पूरा करने दिया जाए। इसके बाद ही प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार उनके तबादले पर निर्णय लिया जाए।


अदालत ने कहा कि बार-बार तबादलों से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है और अधिकारियों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रथम श्रेणी अधिकारियों के लिए न्यूनतम कार्यकाल को लेकर स्पष्ट और निष्पक्ष नीति होना जरूरी है


सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना:
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने पहले से तय मामलों में बार-बार अपील दायर करने पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम गोपाल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी।


कोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता है, लेकिन इसके बावजूद कानूनी रूप से तय मामलों में भी अपीलें दायर की जा रही हैं। इससे अदालत का समय बर्बाद होने के साथ कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक परेशानी होती है।


नौणी यूनिवर्सिटी की पूर्व वार्डन को भी राहत:
हाईकोर्ट ने डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री की पूर्व प्रोफेसर और गर्ल्स हॉस्टल वार्डन डॉ. निवेदिता शर्मा के खिलाफ जारी 9.25 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश भी रद्द कर दिया।


अदालत ने माना कि गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन के लिए हॉस्टल परिसर में रहना जरूरी है, क्योंकि छात्रों के अनुशासन, स्वास्थ्य और रात के समय सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके पद से जुड़ी है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को उनके रोके गए सेवानिवृत्ति लाभ, जिसमें ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं, बिना कटौती जारी करने के निर्देश भी दिए।

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