1 अप्रैल 2027 से लागू होगी ‘वन नेशन, वन बजट लैंग्वेज’, केंद्रीय फंड के खर्च का होगा एक समान वर्गीकरण


शिमला। केंद्र सरकार से मिलने वाले विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के बजट को खर्च करने के तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। देशभर में 1 अप्रैल 2027 से ‘वन नेशन, वन बजट लैंग्वेज’ व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत बजट के प्रत्येक रुपये का एक समान वर्गीकरण और लेखांकन किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत राज्यों को केंद्र से मिलने वाली राशि को अपनी सुविधा के अनुसार दूसरी मदों में खर्च करना मुश्किल होगा। केंद्र और राज्यों के बजट लेखांकन में मौजूद वर्गीकरण संबंधी अंतर को खत्म कर पूरे देश में एक समान बजट कोडिंग और खर्च की भाषा लागू की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश ने भी शुरू की तैयारी
हिमाचल प्रदेश के वित्त विभाग ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और बजट नियंत्रक अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को वर्ष 2027-28 के बजट अनुमान नई ऑब्जेक्ट हेड संरचना के अनुसार तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई प्रणाली में वेतन, पेंशन, मजदूरी, यात्रा खर्च, कार्यालय खर्च, अनुदान, सामाजिक सुरक्षा, छात्रवृत्ति, सड़क और भवन निर्माण समेत 62 प्रमुख मदों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
वेतन-पेंशन का अलग हिसाब
नई व्यवस्था में वेतन, मजदूरी, भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, प्रशिक्षण और एलटीसी जैसे खर्च अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज होंगे। कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और NPS-UPS में सरकारी अंशदान का भी अलग लेखा रखा जाएगा।
वहीं वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग सहायता और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के खर्च को अलग श्रेणी में दर्ज किया जाएगा।
आउटसोर्सिंग खर्च भी होंगे स्पष्ट
सुरक्षा कर्मियों, डेटा एंट्री ऑपरेटरों, हाउसकीपिंग और अन्य आउटसोर्स सेवाओं पर होने वाला खर्च भी अलग से दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा सलाहकार, कानूनी विशेषज्ञ, तकनीकी सलाहकार और ऑडिट एजेंसियों पर होने वाला खर्च प्रोफेशनल सर्विसेज के तहत दर्ज होगा।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से बजट प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि किस योजना और मद पर कितना सरकारी पैसा खर्च हुआ।




