हिमाचल विधानसभा में CM सुक्खू का बड़ा ऐलान: आउटसोर्स से नहीं होगी नर्सों की भर्ती, राज्य चयन आयोग की परीक्षा से होगा चयन, 600 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नर्सों की भर्ती और आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब प्रदेश में नर्सों की भर्ती आउटसोर्स माध्यम से नहीं होगी। स्टाफ नर्सों की नियुक्ति राज्य चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा लेकर की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यक्तिगत साक्षात्कार खत्म किए गए हैं और चयन में मेरिट को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरियों में किसी तरह की सिफारिश नहीं चलेगी।
600 नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल करीब 600 नर्सों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए नर्सों की नियुक्ति नियमित प्रक्रिया के तहत की जाएगी। भविष्य में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से नर्सों की भर्ती करने के बजाय राज्य चयन आयोग की परीक्षा के जरिए चयन किया जाएगा।
लिखित परीक्षा में मेरिट से मिलेगा रोजगार
करसोग के भाजपा विधायक दीपराज ने प्रश्नकाल के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ा सवाल उठाया। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को इम्पैनल करने की व्यवस्था पहले से चली आ रही है। कंपनियों को इम्पैनल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की ओर से विज्ञापन जारी किए जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लिखित परीक्षा में मेरिट हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी मिलेगी। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में सिफारिश की किसी भी संभावना से इनकार करते हुए कहा कि नौकरी में किसी की सिफारिश नहीं चलेगी।
कोविड में हटाए कर्मचारियों को दोबारा रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड काल में नौकरी से हटाए गए कुछ कर्मचारियों को दोबारा रोजगार दिया गया है। अन्य पात्र कर्मचारियों को भी नीति और नियमों के अनुसार वापस रखने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर सरकार नीतिगत स्तर पर भी सुधार की दिशा में काम कर रही है।
वेतन में कटौती करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई
सीएम सुक्खू ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित है। यदि कोई एजेंसी कर्मचारियों के वेतन से नियमों के विपरीत राशि काटती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार इस बात पर भी नजर रखेगी कि विभागों की ओर से स्वीकृत कर्मचारियों की संख्या के मुकाबले वास्तव में कितने कर्मचारियों को काम पर रखा जा रहा है।
रोजगार का मुद्दा भी सदन में प्रमुख
विधानसभा के पांचवें दिन रोजगार का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। सदन में विभिन्न विभागों और जनसमस्याओं से जुड़े 67 प्रश्न लगाए गए हैं, जिनमें 45 तारांकित और 22 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं।
इसके अलावा नियम-130 के तहत युवाओं के रोजगार की गारंटी और जलविद्युत परियोजनाओं से बकाया राशि की वसूली जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। नियम-62 के तहत डिजिटल मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को पेश आ रही समस्याओं का मुद्दा भी सदन में उठाया जाएगा।
मानसून सत्र के पांचवें दिन रोजगार, आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तें और सरकारी भर्ती प्रक्रिया प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। मुख्यमंत्री के नर्सों की भर्ती आउटसोर्स से नहीं कराने के ऐलान को स्वास्थ्य क्षेत्र में नियुक्तियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।




