हिमाचल के सरकारी CBSE स्कूलों में अब नहीं चलेगी मनमर्जी, शिक्षक उपलब्ध होने पर ही पढ़ाए जाएंगे ऐच्छिक विषय; नियम तोड़ने पर होगी जवाबदेही


शिमला, 9 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई से संबद्ध सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में अब विषयों के संचालन को लेकर मनमानी नहीं चलेगी। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों में उन्हीं ऐच्छिक विषयों की पढ़ाई करवाई जा सकेगी, जिनके लिए संबंधित शिक्षक उपलब्ध होंगे। शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में किसी भी ऐच्छिक विषय को संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
इसके साथ ही स्कूलों में गैर-मान्यता प्राप्त वोकेशनल ट्रेड और स्किल मॉड्यूल के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त नहीं होने वाले किसी भी ट्रेड या स्किल विषय को विद्यार्थियों को नहीं पढ़ाया जा सकेगा।
परीक्षा और प्रमाणपत्र में नहीं आएगी परेशानी
निदेशालय के निर्देशों के अनुसार गैर-मान्यता प्राप्त विषयों को विद्यार्थियों की एलओसी यानी लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स में भी शामिल नहीं किया जा सकेगा। विभाग का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को भविष्य में परीक्षा, प्रमाणपत्र और मान्यता से जुड़ी परेशानियों से बचाया जा सकेगा।
सभी स्कूल प्रमुखों को सीबीएसई संबद्धता उप-नियम 2018 और परीक्षा उप-नियम 1995 का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों की अनदेखी होने पर संबंधित स्कूल प्रमुख और संस्थान की जवाबदेही तय की जाएगी।
11वीं-12वीं में विषय चयन की होगी समान व्यवस्था
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा में विषय चयन की एक समान व्यवस्था लागू की जाएगी।
साइंस स्ट्रीम में अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान अनिवार्य होंगे, जबकि गणित या जीव विज्ञान में से एक विषय चुनने का विकल्प रहेगा। इसके अलावा मनोविज्ञान, शारीरिक शिक्षा, ललित कला, संगीत, इंफॉर्मेटिक्स प्रैक्टिसेज और विभिन्न स्किल विषय उपलब्ध रहेंगे।
कॉमर्स स्ट्रीम में अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, लेखांकन और व्यवसाय अध्ययन मुख्य विषय होंगे। विद्यार्थी एप्लाइड मैथ्स, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, संगीत, कला और स्किल विषयों में से विकल्प चुन सकेंगे।
वहीं आर्ट्स स्ट्रीम में अंग्रेजी के साथ हिंदी या अर्थशास्त्र तथा इतिहास या गणित के संयोजन की व्यवस्था रहेगी। भूगोल, राजनीतिक विज्ञान, समाजशास्त्र, गृह विज्ञान, संगीत, शारीरिक शिक्षा और स्किल विषय भी विकल्प के तौर पर उपलब्ध होंगे।
इसके अलावा सभी संकायों के विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा, कार्यानुभव और सामान्य अध्ययन का आंतरिक मूल्यांकन अनिवार्य रहेगा।




