हिमाचल के चीन सीमा से सटे गांवों में 166 करोड़ से बनेंगी 70 विकास योजनाएं, मजबूत होगा सड़क-पानी-बिजली और संचार ढांचा; पलायन रोकने पर जोर


शिमला, 11 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के चीन अधिकृत तिब्बत सीमा से सटे गांवों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने 70 विकास योजनाओं को प्रारंभिक मंजूरी दी है। इन योजनाओं पर करीब 166 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजनाएं मुख्य रूप से किन्नौर और लाहौल-स्पीति के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित हैं।
राज्य सचिवालय में सोमवार को मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इन योजनाओं की प्राथमिकता, लागत और केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह आरडी नजीम सहित जनजातीय विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।राज्य सरकार इन 70 योजनाओं को अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार को भेजेगी और इनके लिए करीब 166 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी जाएगी।
प्रस्तावित विकास कार्यों में सीमावर्ती गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, संचार और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके गांवों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि रोजमर्रा की जरूरतों और आजीविका के लिए उन्हें दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन न करना पड़े। सीमावर्ती गांवों में आबादी का बने रहना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
हिमाचल प्रदेश चीन के साथ करीब 240 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इसमें किन्नौर में लगभग 160 किलोमीटर और लाहौल-स्पीति में करीब 80 किलोमीटर सीमा शामिल है। सीमावर्ती गांवों के विकास को केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से भी जोड़ा गया है। इस कार्यक्रम के तहत हिमाचल के 75 गांवों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है और 98 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।
सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय तक संपर्क प्रभावित रहता है। ऐसे में सड़क और संचार नेटवर्क को मजबूत करना स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच के लिए भी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इन 70 योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी।




